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लोन लेकर मुआवजा देगा यमुना प्राधिकरण
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Tue, 16 Sep 2014 03:21 AM IST
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यमुना प्राधिकरण ने सोमवार को 51वीं बोर्ड बैठक में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई फैसलों को मंजूरी दे दी। मुकदमे वापस लेने पर किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा।
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आबादी नियमित करने और सात फीसदी आवासीय भूखंड की धनराशि नकद देने का फैसला किया गया है। प्रस्तावों की मंजूरी से प्राधिकरण पर 5245 करोड़ रुपये का बोझ पडे़गा, जिसके लिए प्राधिकरण लोन लेगा।
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प्राधिकरण के सीईओ पीसी गुप्ता ने बताया कि शासन ‘नो लिटिगेशन इंसेंटिव’ के रूप में 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देगा। गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर में 517.6 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि किसान की अर्जित भूमि का 7 प्रतिशत का आबादी भूखंड दिया जाता है, जिसके बदले में भुगतान किए गए प्रतिकर का 10 प्रतिशत की धनराशि तथा धनराशि की आधी राशि विकास शुल्क के रूप में जमा करनी होगी। इसके बाद ही शेष धनराशि का भुगतान किया जाएगा।
अतिरिक्त मुआवजे से पहले देना होगा शपथपत्र
अतिरिक्त मुआवजा तब ही दिया जाएगा जब किसान कोर्ट के मुकदमे वापस लेंगे। साथ ही भविष्य में किसान कोई मुकदमा नहीं करेगा। इसके लिए किसानों को शपथ पत्र देना होगा। प्राधिकरण के आवंटी और विकास कार्य को नहीं रोकेंगे। इन शर्तों के पूरा होते ही गांव के सभी मुकदमे वापस होने, कब्जा खाली करने के बाद एक साथ अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान होगा।
किसानों को कारखाना लगाने का प्रोत्साहन
किसानों को कारखाने लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को औद्योगिक भूखंड खरीदने पर उसको नकद भुगतान पर 10 फीसदी की छूट दी जाएगी। तीन साल के अंदर किसान अपने भूखंड को किसी को बेच भी सकता है, लेकिन उस भूखंड पर केवल कारखाना ही स्थापित किया जाएगा।
आबादी नियमावली में प्रस्तावित संशोधन स्वीकार
31 दिसंबर 2012 के पूर्व निर्मित आबादी को नियमित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही 30 जून 2011 के पूर्व निर्मित आबादी के नियमतीकरण में प्रति परिवार की अधिकतम 5000 वर्ग मीटर तक तथा 30 जून 2011 से 21 दिसंबर 2012 तक अधिकतम 3000 वर्ग मीटर आबादी ही नियमित की जाएगी। आबादी के मामले का निस्तारण एसडीएम और पुलिस क्षेत्राधिकारी करेंगे। जिससे मामलों को निस्तारण जल्द किया जा सके।
पुश्तैनी और गैरपुश्तैनी का अंतर खत्म
1 जनवरी 2014 से पुश्तैनी और गैरपुश्तैनी के भेद को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। जो किसान सात प्रतिशत आवासीय प्लॉट नहीं लेना चाहता है उसको आवासीय भूखंड के स्थान पर प्राधिकरण की आवासीय आवंटन दर अथवा सात प्रतिशत आबादी भूमि के निर्धारित सर्किल रेट में, जो अधिक हो उसके बराबर धनराशि का भुगतान किया जाएगा।