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खास खबरः कोरोना काल में हीरा, लक्ष्मी और शंकर हैं उदास, सुंदरम का भी बदला व्यवहार
Sat, 03 Oct 2020 05:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा
किशन कुमार, नई दिल्ली
किशन कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 03 Oct 2020 05:21 AM IST
सार
- इंसानों की घटी चहलकदमी को महसूस कर रहे चिड़ियाघर के वन्यजीव
- अफ्रीकन हाथियों, सिंह, भालू, लोमड़ी और बंदरों के व्यवहार पर पड़ रहा है खास असर
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इंसानों से दूरियां चिड़ियाघर के जानवर भी महसूस कर रहे हैं...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आजकल हीरा उदास है और लक्ष्मी भी अलग-थलग पड़ी रहती है। शंकर भी सुस्त रहने लगा है। सुंदरम, अखिला, हेमा और अमन का व्यवहार भी थोड़ा बदल सा गया है। कोरोना काल में इन अफ्रीकन हाथियों और सिंह का मूड ही नहीं, भालू, लोमड़ी और बंदरों समेत ज्यादातर वन्यजीवों पर इंसानों की चहलकदमी कम होने का बड़ा असर पड़ा है। वह सुस्त रहने लगे हैं। जू प्रशासन के कर्मचारियों के बाड़ों में पहुंचते ही अजीब सी हलचल होने लगती है। वन्यजीवों की आंखों में चमक आ जाती है, लेकिन इनके जाते ही वह फिर मायूस हो जाते हैं।
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छाई रहती है खामोशी
चिड़ियाघर के निदेशक रमेश कुमार पांडे के मुताबिक, यह पहली बार है जब देशभर के चिड़ियाघर इतने लंबे समय तक बंद रहे हैं। यही वजह है कि वन्यजीवों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिला है। इनमें खासतौर पर हाथी हीरा, लक्ष्मी, शंकर और सिंह सुंदरम, अखिला, हेमा व अमन शामिल हैं। भालू, बंदर, लोमड़ी आदि वन्यजीव भी बेहद खामोशी के साथ रहने लगे हैं। चिड़ियाघर में शुरू से ही यह जानवर लोगों की मौजूदगी में रहे हैं, लेकिन बीते छह महीने से इन्हें अब पहले की तरह शोर और पर्यटकों की आवाज नहीं सुनाई देती है। यही वजह है कि जब भी चिड़ियाघर प्रशासन के कर्मचारी इन वन्यजीवों के बाड़े में पहुंचते हैं तो इनकी आंखों में एक अलग चमक आ जाती है।
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खुद को करते हैं अकेला महसूस
शुरू से ही यह वन्यजीव लोगों के बीच में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराते आए हैं। अब लोगों की चहलकदमी नहीं होने से बाड़ों में रह रहे वन्यजीव भी खुद को अकेला महसूस करने लगे हैं। इसमें प्रमुख रूप से अफ्रीकन हाथी और सिंह की प्रतिक्रिया अधिक देखने को मिलती है।
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मिलनसार होते हैं वन्यजीव
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथी, बंदर व भालू मिलनसार भाव के हैं। यही वजह है कि लोग इन्हें पालते भी हैं, जिस प्रकार मनुष्य में संवेदनाएं होती हैं, इसी प्रकार इन वन्यजीवों में भी मनुष्य के प्रति संवेदनाएं होती हैं। यही वजह है कि प्रमुख रूप से हाथी का भी इंसानों के प्रति अधिक लगाव देखा जाता है। चिड़ियाघर के निदेशक के मुताबिक, शुरू से ही वन्यजीव बाड़ों में इंसानों के मौजूदगी में रहे हैं। इन वन्यजीवों का जन्म भी यही हुआ है। ऐसे में इन्हें लोगों की मौजूदगी की भी आदत है। हालांकि, अब पहले के मुकाबले चहल-पहल कम हो गई है और इस वजह से यह थोड़े उदास रहते हैं।
लंबे समय तक सेहत पर पड़ेगा असर
जिस प्रकार कोरोना और लॉकडाउन की वजह से वन्यजीवों को पहले के मुकाबले शांति मिली है। इससे निश्चित तौर पर उनके स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई अध्ययन नहीं किया गया है, लेकिन यदि अनुभव की बात करें तो हम इसका अनुमान लगा सकते हैं। क्योंकि, प्राकृतिक माहौल का इंसान के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी प्रभाव पड़ता है। खासतौर पर यह उनके शारीरिक और मानसिक विकास को भी प्रभावित करता है।
राजधानी में लौटी लुप्त प्राय पक्षियों की प्रजातियां
पक्षी विशेषज्ञ निखिल दिवासर के मुताबिक, राजधानी में लॉकडाउन की वजह से कुछ लुप्त प्राय पक्षियों की प्रजाति भी देखने को मिली थी। हालांकि, अब अनलॉक की कड़ी में फिर से वही हालात हो चुके हैं, लेकिन पहले के मुकाबले पक्षियों ने आंगन से लेकर आसपास के पार्कों में भी अपने लिए जगह बनाई है। लॉकडाउन के समय राजधानी में ब्लैक बेलिड टर्न, इंडियन स्कीमर और शाहीन फाल्कन आदि प्रजातियां वापस लौटी हैं। कुछ वेटलैंड इलाकों में भी पक्षियों की संख्या बढ़ी है। इसमें नजफगढ़ वेटलैंड व सुल्तानपुर के आसपास के इलाके भी शामिल हैं। राजधानी में फिलहाल करीब 350 पक्षियों की प्रजातियां हैं।
बढ़ गया था दायरा
लॉकडाउन में दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर वन्यजीवों को देखे जाने के भी कई मामले सामने आए थे। इस संबंध में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक कार्तिक नारायण ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोरोना की वजह से वन्यजीवों के जीवन पर प्रभाव पड़ा था। लॉकडाउन की वजह से सुनसान हुई दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर वन्यजीवों को देखे जाना आम बात थी। वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में रहने का मौका मिला था। यही वजह थी कि जो जगह कभी वन्यजीवों के रहने के लिए हुआ करती थी। उस पर समय के साथ मनुष्य ने कब्जा कर लिया है