फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   why tarun sagars body taken for last rites in sitting position

क्यों जैन मुनि तरुण सागर को डोली पर बिठाकर अंतिम यात्रा निकाली गई, क्या है पूरी प्रक्रिया?

Mon, 03 Sep 2018 05:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 03 Sep 2018 05:23 PM IST
विज्ञापन
why tarun sagars body taken for last rites in sitting position
jain muni
जैन मुनि तरुण सागर, जिनका निधन 1 सितंबर को हुआ था। उनकी अंतिम यात्रा दिल्ली के राधे पूरी से निकाली गई, उनका अंतिम संस्कार गाजियाबाद के मुरादनगर के बसंतपुर सैतली गांव में दाह संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में देशभर से आए श्रद्धालु शामिल हुए थे। लेकिन पिछले तीन दिन से तरुण सागर की अंतिम विदाई का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जैन मुनि को डोली पर बिठाकर अंतिम यात्रा निकालने की वजह से वीडियो चर्चा में हैं। चलिए हम आपको बता दें कि क्यों जैन मुनि को डोली पर बिठाकर अंतिम यात्रा निकाली गई।
विज्ञापन

why tarun sagars body taken for last rites in sitting position
jain muni tarun sagar - फोटो : अमर उजाला
दरअसल जैन संतों का दाह-संस्कार इस प्रक्रिया के तहत पूरा होता है। आपको बता दें कि ऐसी परंपराएं हैं अगर कोई संत समाधि या संथारा लेता है तो देह त्याग करने के बाद उसकी अंतिम यात्रा में ऐसे ही देह को समाधि की मुद्रा में ही बैठाते हैं। इसलिए इसे डोला निकालना भी कहा जाता है। जैन धर्म में परंपरा है कि यदि कोई संत समाधि की मुद्रा में देह त्याग करता है तो उसे मोक्ष भी उसी मुद्रा में मिलेगा। इसलिए जैन मुनि तरुण सागर की अंतिम यात्रा भी ऐसे ही निकाली। 
विज्ञापन
विज्ञापन

why tarun sagars body taken for last rites in sitting position
jain muni tarun sagar
गौरतलब है कि 51 साल के जैन मुनि तरुण सागर जी का 1 सितंबर को तड़के दिल्ली के शाहदरा के कृष्णा नगर में निधन हो गया था। वो पिछले कई दिनों से पीलिया की बीमारी से ग्रसित थे। उन्हें इलाजे के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में भर्ती जैन मुनि पर दवाओं ने भी काम करना बंद कर दिया था और उन्होंने भी अपना इलाज कराने से मना कर दिया था। 
विज्ञापन

why tarun sagars body taken for last rites in sitting position
Tarun Sagar
उनकी अंतिम यात्रा दिल्ली के राधे पूरी से निकाली गयी। करीब 28 उनका अंतिम संस्कार गाजियाबाद के बसंतपुर सैतली गांव में स्थित तरुण सागरम तीर्थ में हुआ। जैन मुनि का जन्म 1967 में मध्य प्रदेश के दमोह जिले के गुंहची गांव हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था। 

why tarun sagars body taken for last rites in sitting position
फाइल फोटो
तरुण सागर बचपन से ही काफी धार्मिक थे। शुरू से ही धर्म में उनका काफी लगाव रहता था। बताया जा जाता है कि उन्होंने 14 साल की उम्र में ही अपना घर त्याग दिया था। वो आचार्यों के साथ रहने लगे थे।सन 1981 में ही उन्होंने अपना घर त्याग छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली थी। तरुण मुनि अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहते थे। उनके निधन से न सिर्फ जैन धर्म के लोगों में दुःख है, बल्कि ये समस्त देश की क्षति है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed