'जब सख्ती हुई तो कन्हैया कुमार को आई संविधान की याद'
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एबीवीपी का कहना है नौ फरवरी को जेएनयू कैंपस में देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आरोपियों के सुर अब बदल गए हैं। न्यायपालिका, कार्यपालिका व विधायिका ने सख्ती दिखाई तब जाकर इनको संविधान की याद आने लगी है।
विद्यार्थी परिषद का आरोप है कि अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगाने की घटना को देश में आजादी की बात से जोड़कर अब मुख्य मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर जेएनयू छात्रसंघ व एबीवीपी सात मार्च को वसंत कुंज थाने का घेराव करेगा और अन्य आरोपी छात्रों पर भी कार्रवाई करने की मांग की जाएगी।
जेएनयू कैंपस में शनिवार को छात्रसंघ के संयुक्त सचिव व एबीवीपी के पदाधिकारी सौरभ शर्मा व एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक साकेत बहुगुणा ने संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि देश को तोड़ने नहीं, बल्कि जोड़ने की बात करने पर जोर दें। सौरभ शर्मा ने छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर भ्रांतियां फैलाने का भी आरोप लगाया है।
जो संविधान नहीं मानते थे वो उसकी आड़ में खुद को बचा रहे हैं
उन्होंने कहा कि नौ फरवरी को कैंपस में देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया गया लेकिन छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया अब अपने भाषण में कट्टरता, शोषण, पिछड़ेपन, दलित, गरीबी आदि को मुद्दा बनाकर इनसे आजादी मांगने की बात कर रहे हैं।
जो लोग संविधान को नहीं मानते थे, वे अब संविधान की आड़ में बचाने की कोशिश कर रहे हैं। जब न्यायपालिका व विधायिका ने सख्ती दिखाई तब जाकर इनको संविधान में विश्वास होने लगा।
साकेत ने कहा कि कुछ लोग अपने भाषण में अदालत द्वारा अंतरिम जमानत देने के दौरान जो टिप्पणियां की गयी थी, उसे भी गरीब, दलित, पिछड़े और किसान भाइयों को बताते तो देश को पता चलता कि सच्चाई क्या है।
सौरभ का कहना था कि अदालत ने भी अपनी टिप्पणी में माना है कि नौ फरवरी को जेएनयू कैंपस में आतंकी अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम में देशविरोधी नारे लगे थे।