फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Waiting for justice: Lawyer had filed FIR in 2014, chargesheet not filed till now

न्याय का इंतजार: वकील ने 2014 में दर्ज करवाई थी एफआईआर, आज तक दाखिल नहीं हुआ आरोपपत्र

Thu, 23 Sep 2021 11:59 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली
धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Thu, 23 Sep 2021 11:59 AM IST
सार

इससे हमारी न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि न्याय दिलाने वाले इंसाफ के लिए चक्कर काट रहे हैं। पिछले पांच साल से एफएसएल रिपोर्ट का पुलिस कर रही इंतजार।

विज्ञापन
Waiting for justice: Lawyer had filed FIR in 2014, chargesheet not filed till now
Court, Judge, lawyer - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

कहते हैं देरी से मिला न्याय, न्याय नहीं होता। हालात ऐसे हैं कि वकील न्याय पाने के लिए सालों से चक्कर काट रहे हैं तो आम आदमी की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक वकील के सात साल पुराने मामले में आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है। वहीं पांच साल बाद भी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) रिपोर्ट नहीं मिली है। अदालत ने अब जांच अधिकारी को इस पर कानूनी सलाह लेने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
विज्ञापन


आज तक एफएसएल की जांच पूरी नहीं हो पाई
तीस हजारी अदालत में एक अधिवक्ता की शिकायत पर मुकदमा चल रहा है। उन्होंने फेसबुक पर उनके नंबर के गलत इस्तेमाल पर 2014 में थाना सराय रोहिल्ला में एफआईआर करवाई थी। पुलिस ने इस मामले में एफएसएल से जांच कराने का अनुरोध किया था। तब से आज तक एफएसएल की जांच पूरी नहीं हो पाई है। जांच अधिकारी भी आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाया।
विज्ञापन


जांच अधिकारी ने अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं किया
महानगर दंडाधिकारी चारु असीवाल के समक्ष शिकायतकर्ता के वकील ऋषभ जैन ने कहा कि जांच अधिकारी ने अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं किया है। उसमें अदालत ने सात दिनों के भीतर आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि अदालत ने ये आदेश अप्रैल 2021 में दिया था और चार माह से अधिक बीतने के बाद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है। अब इस मामले में आरोपपत्र दाखिल करने के संबंध में समय-सीमा संबंधी प्रावधान लागू हो जाएंगे। इसलिए जांच अधिकारी इस मामले में देर कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जांच अधिकारी ने कहा कि उसे इस पर कानूनी सलाह लेनी होगी
वहीं मामले के जांच अधिकारी ने कहा कि एफएसएल की जांच रिपोर्ट न मिलने के कारण आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जा सका है। एफएसएल से पांच साल बाद भी रिपोर्ट नहीं मिली है। जांच अधिकारी ने बताया कि लैब को आठ बार पत्र लिखे जा चुके हैं। इनमें से कई पत्र डीसीपी कार्यालय की ओर से लिखे गए हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या ये संभव है कि एफएसएल रिपोर्ट के बिना आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाए और एफएसएल रिपोर्ट बाद में पूरक आरोपपत्र में दाखिल कर दी जाए। इस पर जांच अधिकारी ने कहा कि उसे इस पर कानूनी सलाह लेनी होगी। इसके लिए उसने 20-25 दिन का समय मांगा।


जांच अधिकारी के इस तर्क पर अधिवक्ता जैन ने कहा आपत्ति जताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस के पास हर जिले में 5-5 कानूनी सलाहकार हैं जिनसे शीघ्र ही सलाह ली जा सकती है। इसलिए 25 दिन का समय देना जरूरी नहीं है। इस तर्क से सहमति जताते हुए अदालत ने जांच अधिकारी को 15 दिन में कानूनी सलाह लेकर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed