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पूर्व सीएम चौटाला की सजा माफी की याचिका पर फैसला सुरक्षित

Wed, 27 Nov 2019 02:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 27 Nov 2019 02:53 AM IST
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verdict on the mercy petition of former CM Chautala reserved 
Delhi high-court

जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में करीब 7 साल से जेल में सजा काट रहे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की सजा माफी की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई मंगलवार को पूरी हो गई। इस मामले में उच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। 

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दिल्ली सरकार ने उनकी समयपूर्व रिहाई का विरोध करते हुए कहा था कि 84 वर्षीय चौटाला को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत दोषी ठहराया गया है। इस अधिनियम में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। 
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न्यायाधीश मनमोहन और न्यायाधीश संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ के समक्ष ओपी चौटाला ने वकील अमित साहनी के माध्यम से याचिका दायर की थी। इनेलो के पूर्व मुखिया ओपी चौटाला ने कहा था कि केंद्र सरकार के विशेष राहत के प्रावधान के तहत उन्हें रिहाई मिलनी चाहिए। 
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वे करीब 7 साल की सजा जेल में काट चुके हैं। बढ़ती उम्र के मद्देनजर केंद्र सरकार की ओर से तय नए नियमों के मापदंड को वह पूरा करते हैं। ओपी चौटाला ने याचिका में बढ़ती उम्र और दिव्यांगता को आधार बनाया था। उनके अधिवक्ता ने यह भी कहा था कि वर्ष 2013 में जब चौटाला को सजा सुनाई गई थी तो इस पीसी एक्ट में अधिकतम सजा 7 वर्ष थी। 

इस मामले में साजिश रचने की धारा (120बी) को भी पीसी एक्ट के साथ देखा जाए तो भी अधिकतम सजा 7 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए थी। ओपी चौटाला के बेटे अजय चौटाला, आईएएस अधिकारी संजीव कुमार और 53 अन्य लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया गया था। इन्हें जेल की सजा हुई थी। इनमें 16 महिला अधिकारी शामिल थीं। 


3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में घोटाला तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार ने उजागर किया था। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। हालांकि बाद में इस मामले में संजीव कुमार को भी शामिल पाया गया था। सीबीआई के अनुसार, संजीव भी इस घोटाले में भागीदार थे। इस प्रकरण में शामिल अन्य लोगों से विवाद होने के कारण वह उनके खिलाफ हो गए।

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