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Delhi NCR News: जेएनयू में विरोध के तरीके पर घमासान, शिक्षक ने जताई आपत्ति
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क्रिस्टु दास बोले बहस से सुलझाएं मतभेद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी के साथ कथित भीड़ द्वारा डराने-धमकाने की घटना पर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि असहमति को शारीरिक बल या भीड़ के दबाव से व्यक्त नहीं किया जा सकता।
जेएनयू छात्र संघ पर बृहस्पतिवार को प्रोफेसर कुमारस्वामी के खिलाफ अभद्र व्यवहार, आपत्तिजनक नारेबाजी करने और उनका रास्ता रोकने का आरोप है। छात्र संघ के पदाधिकारी भर्ती में अनियमितता के खिलाफ प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे। प्रोफेसर दास ने जोर दिया कि मतभेद, संस्थागत शिकायत या राजनीतिक असहमति को परिसर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से ही सामने रखा जाना चाहिए।
कहा कि जेएनयू की पहचान एक लोकतांत्रिक अकादमिक परिसर की रही है। यहां कठिन सवाल उठाए जाते हैं और विवादित मुद्दों पर बहस होती है। छात्रों और शिक्षकों को फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, लोकतांत्रिक विरोध और भीड़ के जरिये डराने-धमकाने के बीच स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कहा कि शारीरिक डराने-धमकाने की जेएनयू में कोई जगह नहीं है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी के साथ कथित भीड़ द्वारा डराने-धमकाने की घटना पर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि असहमति को शारीरिक बल या भीड़ के दबाव से व्यक्त नहीं किया जा सकता।
जेएनयू छात्र संघ पर बृहस्पतिवार को प्रोफेसर कुमारस्वामी के खिलाफ अभद्र व्यवहार, आपत्तिजनक नारेबाजी करने और उनका रास्ता रोकने का आरोप है। छात्र संघ के पदाधिकारी भर्ती में अनियमितता के खिलाफ प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे। प्रोफेसर दास ने जोर दिया कि मतभेद, संस्थागत शिकायत या राजनीतिक असहमति को परिसर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से ही सामने रखा जाना चाहिए।
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कहा कि जेएनयू की पहचान एक लोकतांत्रिक अकादमिक परिसर की रही है। यहां कठिन सवाल उठाए जाते हैं और विवादित मुद्दों पर बहस होती है। छात्रों और शिक्षकों को फैसलों पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। हालांकि, लोकतांत्रिक विरोध और भीड़ के जरिये डराने-धमकाने के बीच स्पष्ट अंतर है। उन्होंने कहा कि शारीरिक डराने-धमकाने की जेएनयू में कोई जगह नहीं है।
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