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Delhi NCR News: जातिवादी टिप्पणी पर हंगामा, डीयू प्रोफेसर के कार्यालय में तोड़फोड़
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- टीवी डिबेट में विवादित बयान के बाद प्रोफेसर ने सोशल मीडिया पर मांगी माफी, आइसा ने प्रदर्शन कर निलंबन की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर की टीवी डिबेट में की गई विवादित टिप्पणी को लेकर बुधवार को विवाद बढ़ गया। कुछ लोगों ने राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रो. संगीता कुमार रागी के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की। प्रोफेसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता मनोज काका के खिलाफ कथित जातिवादी टिप्पणी करने का आरोप है। हालांकि, कार्यालय में तोड़फोड़ करने वाले लोग विद्यार्थी थे या बाहरी, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, प्रो. रागी ने एक समाचार चैनल पर आयोजित टीवी डिबेट के दौरान सपा प्रवक्ता मनोज काका को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद उन पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे और विवाद बढ़ गया। मामले में प्रोफेसर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की गई थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है। उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था। इसके बावजूद बुधवार को उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई।
आइसा ने प्रदर्शन कर प्रोफेसर का पुतला फूंका-
दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के आह्वान पर छात्रों ने नॉर्थ कैंपस स्थित राजनीतिक विज्ञान विभाग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रोफेसर का पुतला भी फूंका गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रो. रागी को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। आइसा की डीयू इकाई की अध्यक्ष निराली ने कहा कि शिक्षकों की ओर से जातिगत अपमानजनक टिप्पणियां किए जाने से वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों और शिक्षकों में असुरक्षा का माहौल बनता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर की टीवी डिबेट में की गई विवादित टिप्पणी को लेकर बुधवार को विवाद बढ़ गया। कुछ लोगों ने राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रो. संगीता कुमार रागी के कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की। प्रोफेसर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता मनोज काका के खिलाफ कथित जातिवादी टिप्पणी करने का आरोप है। हालांकि, कार्यालय में तोड़फोड़ करने वाले लोग विद्यार्थी थे या बाहरी, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, प्रो. रागी ने एक समाचार चैनल पर आयोजित टीवी डिबेट के दौरान सपा प्रवक्ता मनोज काका को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद उन पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप लगे और विवाद बढ़ गया। मामले में प्रोफेसर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की गई थी, बल्कि उन लोगों के लिए थी जो अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बात से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है। उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था। इसके बावजूद बुधवार को उनके कार्यालय में तोड़फोड़ की घटना हुई।
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आइसा ने प्रदर्शन कर प्रोफेसर का पुतला फूंका-
दूसरी ओर, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के आह्वान पर छात्रों ने नॉर्थ कैंपस स्थित राजनीतिक विज्ञान विभाग के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रोफेसर का पुतला भी फूंका गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रो. रागी को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की। आइसा की डीयू इकाई की अध्यक्ष निराली ने कहा कि शिक्षकों की ओर से जातिगत अपमानजनक टिप्पणियां किए जाने से वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों और शिक्षकों में असुरक्षा का माहौल बनता है।
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