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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   UPI charges raise concerns among merchants; cash becomes an option for large transactions

Delhi NCR News: यूपीआई शुल्क से कारोबारियों की बढ़ी चिंता, बड़े सौदों में कैश का विकल्प

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Sep 2026 08:59 PM IST
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व्यापारियों ने कहा- पहले से ही खर्च ज्यादा, डिजिटल भुगतान की अतिरिक्त लागत मुनाफे पर डालेगी असर
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। दिल्ली के बाजारों के व्यापारियों में दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था को लेकर नाराजगी है। सरोजिनी नगर, लाजपत नगर, पालिका बाजार, कनॉट प्लेस, मोती बाग, सदर बाजार, कोटला, कालकाजी और नेहरू प्लेस समेत कई प्रमुख बाजारों के व्यापारियों का कहना है कि कारोबार में पहले ही कई तरह के खर्च बढ़ रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ पड़ा तो इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ेगा।
खासकर उन बाजारों में समस्या अधिक है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में दो हजार रुपये से अधिक के बिल बनते हैं। व्यापारियों के अनुसार, ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की सुविधा देने के लिए दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए गए थे। यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल से नकदी रखने और लेनदेन की परेशानी भी कम हुई थी। लेकिन अब शुल्क की व्यवस्था के कारण बड़े भुगतान में यूपीआई के इस्तेमाल को लेकर व्यापारी असमंजस में हैं।
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पालिका बाजार शॉपकीपर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव विनय के मुताबिक, पालिका बाजार के व्यापारी भी शुल्क के फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क लगने से कारोबार की लागत बढ़ेगी। व्यापारी चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान की सुविधा जारी रहे, लेकिन इसका अतिरिक्त बोझ कारोबारियों पर नहीं डाला जाए।
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कोटला, सदर बाजार, नेहरू प्लेस और कालकाजी के व्यापारियों का भी कहना है कि दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था छोटे कारोबारियों की परेशानी बढ़ा सकती है। व्यापारियों के मुताबिक, हर भुगतान पर बढ़ने वाली लागत को अपनी कमाई से पूरा करना आसान नहीं होगा। उनका कहना है कि पहले से बढ़ी परिचालन लागत के बीच डिजिटल लेनदेन का खर्च भी जुड़ने से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।


कैश का लौटता दौर
कुछ साल पहले तक दिल्ली के बाजारों में नकद भुगतान आम था। यूपीआई और दूसरे डिजिटल माध्यमों के तेजी से बढ़ने के बाद बाजारों में कैश की जरूरत काफी कम हो गई। दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए गए और ग्राहक छोटे से लेकर बड़े भुगतान तक मोबाइल से करने लगे। अब दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क की चिंता के कारण बड़े सौदों में नकद भुगतान फिर चर्चा में आ गया है। सरोजिनी नगर, लाजपत नगर, सदर बाजार और नेहरू प्लेस जैसे बाजारों के व्यापारियों का कहना है कि छोटे भुगतान में यूपीआई का इस्तेमाल जारी रह सकता है, लेकिन बड़े बिल के लिए ग्राहक और व्यापारी नकद को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर के बीच दिल्ली के बाजारों में बड़े कारोबार के लिए कैश एक बार फिर प्रमुख विकल्प बन सकता है।
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