यूनिटेक के खरीदार करेंगे सीबीआई जांच की मांग, नोएडा प्राधिकरण पर सवाल ही सवाल
नोएडा प्राधिकरण और बिल्डर के खिलाफ यूनिटेक के खरीदार सीबीआई जांच की मांग करेंगे। वह इसके लिए प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे। प्राधिकरण और बिल्डर के खिलाफ खरीदार सुप्रीम कोर्ट जाने की भी तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में एक मामला पहले से भी विचाराधीन है, लेकिन प्राधिकरण की ओर से यूनिटेक का भूखंड आवंटन निरस्त करने के बाद खरीदार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-113 स्थित यूनिटेक के आवंटित भूखंड को निरस्त कर दिया है। यूनिटेक ने यहां यूनिहोम्स-3 प्रोजेक्ट के लिए करीब 1600 से ज्यादा खरीदारों की बुकिंग की थी, लेकिन प्राधिकरण का 1203 करोड़ रुपये का बकाया नहीं चुकाने से आवंटन निरस्त हो गया। प्राधिकरण ने यहां बिना नक्शा पास कराए टावर बनाने की बात कही है।
इसी मसले पर यूनिटेक के खरीदार एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ वकील नवनीत कुमार सरीन ने कहा कि बिल्डर ने 2011 से फ्लैट की बुकिंग शुरू की। इसके बाद 90 प्रतिशत फ्लैट बिक गए। बिल्डर ने निर्माण भी शुरू कर दिया। यह 2016 तक चलता रहा। 2016 में प्राधिकरण ने बिल्डर को नोटिस दिया कि उसने नक्शा पास नहीं कराया है।
अब यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांच से छह वर्ष तक प्राधिकरण ने आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई, जब बिल्डर निर्माण कर रहा था। इसी दौरान खरीदारों ने इस प्रोजेक्ट से आकर्षित होकर बुकिंग करा ली।
अभी यहां 80 से 85 प्रतिशत तक राशि देकर खरीदार फंसे हुए हैं। अगर समय रहते प्राधिकरण आपत्ति करता तो शायद इतने खरीदार नहीं फंसते। लिहाजा, इसमें कहीं न कहीं बिल्डर और प्राधिकरण की मिलीभगत की संभावना दिख रही है।
बिना लेआउट प्लान के बैंकों ने कैसे लोन दिया
भूखंड आवंटन रद्द के बाद प्राधिकरण का कहना है कि बिना नक्शा पास कराए यहां 17 टावरों का काम शुरू किया गया यानी प्रोजेक्ट का लेआउट प्लान मंजूर नहीं था। फिर बैंकों ने खरीदारों को लोन कैसे दे दिया। अगर जांच की गई तो यहां भी घालमेल की बात सामने आ सकती है।
मामला कोर्ट में था तब भूखंड कैसे हुआ निरस्त
खरीदारों का कहना है कि 2017 और 2018 में तीन बार कोर्ट के निर्देश आए। इसमें कहा गया था कि प्राधिकरण कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर सकता। इसके अलावा खरीदार, बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बैठक भी हुई, लेकिन खरीदारों के सवाल का प्राधिकरण ने जवाब नहीं दिया। खरीदारों का कहना है कि इस भूखंड को निरस्त करने पर कोर्ट की अवमानना का मामला बन सकता है।
10 प्रतिशत भुगतान करने वाले बिल्डर जस के तस
यूनिटेक के खरीदारों का कहना है कि प्राधिकरण के पास ऐसे कई डिफॉल्टर बिल्डर हैं, जिन्होंने केवल 10 प्रतिशत भुगतान किया है, लेकिन उनका आवंटन निरस्त नहीं हुआ है, जबकि यहां 40 प्रतिशत भुगतान किया गया था। इसके बावजूद भूखंड निरस्त कर दिया गया।
भूखंड वापस क्यों नहीं किया गया
यूनिटेक ने 35 एकड़ जमीन वापसी का आवेदन प्राधिकरण में किया था, लेकिन प्राधिकरण ने आवेदन को खारिज कर दिया। अगर यह भूखंड वापस हो जाता तो शायद बची जमीन में निर्माण कार्य पूरा हो जाता। हालांकि, खरीदारों का कहना है कि आखिर में भूखंड आवंटन निरस्त कर बिल्डर को ही फायदा पहुंचाया गया।
सेक्टर-113 यूनिटेक
- 1912 फ्लैट बनने थे
- 17 टावर बनने थे
- 02 टावर का ढांचा खड़ा है
- 04 टावर की नौ से दस मंजिल के ढांचे बने
- 06 टावर की दो मंजिल तक का ढांचा बना
- 04 टावर के बेसमेंट तैयार
- 01 टावर के बेसमेंट की खुदाई
- 12 मंजिलें भूतल के साथ हर टावर में बननी थीं