राजधानी पहुंचने लगा पड़ोसी राज्यों का धुआं, धूल के महीन कण पीएम 2.5 का दो फीसदी हिस्सा आया
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पंजाब और हरियाणा से निकलने वाला पराली का धुआं अब दिल्ली पहुंचना शुरू हो गया है। शनिवार को करीब दो फीसदी धूल के महीन कण (पीएम 2.5) दिल्ली पहुंचे। उधर, पिछले एक हफ्ते से पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले कुछ साल की तुलना में अभी भी दिल्ली की आबोहवा बेहतर है। अक्तूबर के मध्य से इसके बेहद खराब स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
सिस्टम फॉर एयर क्वॉलिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का कहना है कि पुआल के धुएं का अब दिल्ली पर असर पड़ने लगा है। पश्चिम की तरफ आ रही हवाओं से प्रदूषक तत्व दिल्ली पहुंचने लगे हैं। हालांकि, ऊपरी सतह पर हवा धीमी होने से इसकी मात्रा ज्यादा नहीं है। उधर, सतह पर भी हवा धीमी-धीमी चल रही है। इससे प्रदूषक तत्व दिल्ली से बाहर फैल नहीं पा रहे हैं।
सफर के मुताबिक, शनिवार को दिल्ली में धूल के महीन कण पीएम 2.5 का 2 फीसदी हिस्सा दूसरे राज्यों से बाहर आया। हालांकि, देर शाम हवा में इसका स्तर 97 था। सफर का पूर्वानुमान है कि 16 अक्तूबर तक इसमें तेजी से बढ़ोतरी होगी। बाहर से आने वाले पीएम 2.5 का हिस्सा 6 फीसदी पहुंचने का अंदाजा है।
उधर, दिल्ली शनिवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब स्तर पर 222 रहा। इसमें पीएम 2.5 व पीएम 10 की मात्रा सबसे ज्यादा थी। अगले दो दिन में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है। इस महीने के दूसरे हफ्ते से गुणवत्ता बेहद खराब स्तर तक पहुंच जाएगी। वहीं, दिवाली से पहले इसके गंभीर स्तर पर पहुंचने का अनुमान सफर ने लगाया है।
शनिवार को दिल्ली की आबोहवा पर इन कारकों ने डाला असर
इनकी बेहतर रही स्थिति
- स्थानीय स्तर के धूल के कणों की मात्रा अभी कम।
- हवा में नमी ठीक।
- मिक्सिंग हाइट बेहतर।
- दिल्ली का तापमान ठीक है।
इन कारकों ने किया खराब
- गति धीमी होने से दूर से आने वाली हवाएं प्रदूषक तत्वों को ढोने से नहीं हैं सक्षम।
- सतह पर हवा की गति कम होने से दिल्ली के ऊपर रुकने लगे प्रदूषक तत्व।
- पुआल का धुआं औसत है।