कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में जेआईपीएल के दो निदेशक दोषी करार
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झारखंड में कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में अदालत ने झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (जेआईपीएल) के निदेशकों आर. रूंगटा और आरसी रूंगटा को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप में दोषी ठहराया है।
आवंटन से जुड़े मामलों में यह पहला है, जिसमें फैसला आया है। कोर्ट 31 मार्च को सजा पर सुनवाई करेगी। पटियाला हाउस अदालत स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने फैसले में कहा कि दोनों भाइयों ने वर्ष 2005 में नॉर्थ धादू कोल ब्लॉक पाने के लिए स्क्रीनिंग कमेटी और कोयला एवं इस्पात मंत्रालय के समक्ष तथ्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत किया।
कोर्ट ने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीबीआई ने मामले में 50 से ज्यादा केस दर्ज किए थे। इनमें से 19 में सुनवाई चल रही है।
कोयला बेईमान लोगों को नहीं दिया जा सकता
सीबीआई के अनुसार, रूंगटा ने सरकार की ओर गठित स्क्रीनिंग कमेटी को बताया कि उसने 79 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर लिया है। कोल ब्लॉक पाने के लिए यह शर्त जरूरी थी।
जांच में पाया गया कि कंपनी ने मात्र 32 एकड़ भूमि ही आवंटन तक अधिग्रहित की थी। गवाहों ने कोर्ट को बताया कि भूमि को बेचने के संबंध में डीड पर कालेश्वर महतो और ललित कुमार दास के फर्जी हस्ताक्षर किए गए।
वहीं कोयला मंत्रालय के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि कोयला एक राष्ट्रीयकृत प्राकृतिक संसाधन है। इस प्रकार इसे बेईमान लोगों को नहीं दिया जा सकता। अफसरों को सभी आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए थी।