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मुसीबत: अर्थव्यवस्था को भी बीमार कर रही है दिल्ली की जहरीली हवा, घटती कार्यक्षमता की भारी कीमत चुका रहे लोग
Sun, 08 Nov 2026 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
ज्योति सिंह, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 08 Nov 2026 05:57 AM IST
सार
जहरीली हवा के कारण किसी की सांसें थम रही हैं, तो कोई बीमारी के चलते काम पर नहीं जा पा रहा है। अस्पतालों में इलाज पर खर्च बढ़ रहा है और समय से पहले होने वाली मौतों के कारण कामकाजी आबादी भी प्रभावित हो रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की हवा अब सिर्फ लोगों का दम नहीं घोंट रही, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था की सेहत भी बिगाड़ रही है। जहरीली हवा के कारण किसी की सांसें थम रही हैं, तो कोई बीमारी के चलते काम पर नहीं जा पा रहा है। अस्पतालों में इलाज पर खर्च बढ़ रहा है और समय से पहले होने वाली मौतों के कारण कामकाजी आबादी भी प्रभावित हो रही है। यानी प्रदूषण की कीमत दिल्ली के लोग अपनी सेहत, कमाई और जिंदगी से चुका रहे हैं।
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ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (जीबीडी) 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में हर सात में से एक मौत के पीछे वायु प्रदूषण जिम्मेदार है। 2023 में प्रदूषण से करीब 17,188 मौतों का अनुमान है। यह कुल मौतों का लगभग 15 फीसदी है। दूसरी ओर, आर्थिक नुकसान पर हुए एक अध्ययन में दिल्ली में वायु प्रदूषण से प्रति व्यक्ति होने वाली आर्थिक क्षति देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक आंकी गई है। वहीं, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच दिल्ली में प्रदूषण से होने वाली मौतों में 1,402 यानी 8.9 फीसदी की वृद्धि हुई।
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यह आंकड़ा हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों के अनुमान से भी अधिक है। यानी जिस प्रदूषण को अक्सर सर्दियों में खराब एक्यूआई के रूप में देखा जाता है, उसका असर पूरे साल लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
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जहांगीरपुरी में पीएम 2.5 के स्वास्थ्य प्रभाव का स्तर सबसे अधिक
दिल्ली में प्रदूषण का असर सभी इलाकों में एक जैसा नहीं है। इकोटॉक्सिकोलॉजी एंड एनवायरनमेंटल सेफ्टी जर्नल में 2025 में प्रकाशित शोध के मुताबिक, उत्तर भारत के पांच राज्यों में पीएम 2.5 प्रदूषण और उससे जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों का विश्लेषण किया गया। इसमें दिल्ली के जहांगीरपुरी क्षेत्र में पीएम 2.5 के संपर्क से जुड़े संभावित स्वास्थ्य नुकसान का स्तर अध्ययन में शामिल निगरानी केंद्रों में सबसे अधिक पाया गया।
परिवहन, बायोमास और धूल भी बढ़ा रहे प्रदूषण
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की 20 फरवरी 2026 को हुई 27वीं पूर्ण आयोग बैठक में 33 विशेषज्ञों के पैनल की रिपोर्ट पर विचार किया गया।
मौतों के साथ कामकाज और कमाई पर भी चोट
द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में 2021 में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2019 में भारत में वायु प्रदूषण के कारण समय से पहले हुई मौतों और बीमारियों से उत्पादकता को करीब 36.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था। यह देश की जीडीपी का 1.36 फीसदी था। अध्ययन में दिल्ली में प्रति व्यक्ति आर्थिक नुकसान सबसे अधिक पाया गया। इसके बाद हरियाणा का स्थान था। बाहरी हवा में मौजूद कणों से होने वाले प्रदूषण के कारण उत्पादकता का नुकसान दिल्ली की जीडीपी के करीब 1.06 फीसदी के बराबर आंका गया था। इस बीच, सीआरईए और राइट टू क्लीन एयर प्लेटफॉर्म की हालिया रिपोर्ट ने तुर्किये में जीवाश्म ईंधन से होने वाले पीएम 2.5 प्रदूषण की आर्थिक कीमत सामने रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां हर साल करीब 26,500 मौतें होती हैं और स्वास्थ्य संबंधी 55 अरब डॉलर का नुकसान होता है। यह 2024 में तुर्किये की जीडीपी का 4.1 फीसदी है।
जहरीली हवा की कीमत, मौतों का बढ़ता आंकड़ा बना चिंता
- 17,188 मौतें: 2023 में दिल्ली में वायु प्रदूषण से मौतों का अनुमान
- हर सातवीं मौत: कुल मौतों में प्रदूषण की अनुमानित हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी
- 36.8 अरब डॉलर: 2019 में भारत को वायु प्रदूषण के कारण उत्पादकता का अनुमानित नुकसान
- 1.06 फीसदी: दिल्ली की जीडीपी के बराबर बाहरी वायु प्रदूषण से उत्पादकता का अनुमानित नुकसान
- 55 अरब डॉलर: तुर्किये में जीवाश्म ईंधन से होने वाले पीएम 2.5 प्रदूषण से सालाना स्वास्थ्य संबंधी नुकसान