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ऑटो किराया बढ़ोतरी मामलाः परिवहन संगठन सरकार के खिलाफ हुए एकजुट, दी घेराव की चेतावनी
Sat, 15 Jun 2019 01:31 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 15 Jun 2019 01:31 AM IST
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राजधानी में ऑटो किराये में बढ़ोतरी के मुद्दे पर अन्य सार्वजनिक परिवहन यूनियनें भी अपनी वाहन सेवाओं के लिए किराया बढ़ोतरी मांग पर उतर आयी हैं। स्थिति ऐसी है कि ग्रामीण सेवा, ईको फ्रेंडली सेवा और आरटीवी चालक संगठनों ने सरकार पर किराया बढ़ोतरी में भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार अगर किराया बढ़ाने की इनकी मांग पर विचार नहीं करेगी तो ये संगठन सरकार का घेराव करेंगे।
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भारतीय प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष चंदू चौरसिया ने कहा कि दिल्ली में ग्रामीण सेवा शुरू हुए 10 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस बीच दिल्ली सरकार ने ग्रामीण सेवा का किराया एक बार भी नहीं बढ़ाया है। वहीं उनका आरोप है कि इन्हीं 10 सालों में दिल्ली सरकार ने ऑटो रिक्शा का किराया अब तीसरी बार बढ़ाया है जिससे ग्रामीण सेवा चालकों पर महंगाई की मार पड़ रही है। उनका कहना है कि इस संबंध में वह परिवहन मंत्री से कई बार किराये बढ़ाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने उनके किराये बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
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उनका कहना है कि दिल्ली में वर्तमान में करीब 166 रूटों पर 6138 ग्रामीण सेवा वाहन चल रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार को ग्रामीण सेवा का किराया भी बढ़ाने पर जल्द विचार करना चाहिए। वहीं उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 500 से अधिक ईको फ्रेंडली वाहन चल रहे हैं, इनका किराया भी नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने चेताया है कि अगर सरकार इस बार भी उनके किराये नहीं बढ़ाएगी तो सभी ग्रामीण चालक संगठन सरकार का घेराव करेंगे।
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10 साल में तीसरी बार बढ़ाया ऑटो किराया, आरटीवी में नहीं की कोई बढ़ोतरी
एसटीए एकता मंच के सदस्य श्यामलाल गोला ने बताया दिल्ली सरकार ने ऑटो रिक्शा का किराया वर्ष 2009, 2013 और अब 2019 में तीसरी बार बढ़ाया है, जबकि आरटीवी के किराये में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। उनका कहना है कि सरकार को अगर किराया बढ़ाना है तो संपूर्ण सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को ध्यान में रखा जाना चाहिए, ना कि सिर्फ ऑटो रिक्शों का किराया बढ़ाना चाहिए। उनके मुताबिक दिल्ली में करीब 70-80 रूटों पर 800 आरटीवी चलती हैं, इनका किराया 5, 10 और 15 रुपये है। उन्होंने भी किराया ना बढ़ने पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की बात कही है। हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से ग्रामीण सेवा, ईको फ्रेंडली सेवा और आरटीवी के किराये में बढ़ोतरी के लिए कोई कदम उठता नहीं दिख रहा है।