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डॉक्टर बनने के लिए अलग से नहीं देनी होगी परीक्षा,संसद की स्थायी समिति ने सौंपी रिपोर्ट 

Wed, 21 Mar 2018 10:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 21 Mar 2018 10:02 AM IST
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To be a doctor, do not have to give separate examination

डॉक्टर बनने के लिए अब अलग से लाइसेंस परीक्षा नहीं देनी होगी। एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में ही एक या दो पेपर जुड़ सकते हैं। जिन्हें पास करने के बाद छात्र देश में प्रैक्टिस करने के लिए योग्य होगा।

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ये सिफारिशें संसद की स्थायी समिति ने नए चिकित्सीय कानून नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) बिल के संशोधन में दी है। मंगलवार को दोनों सदनों में चेयरमेन राम गोपाल यादव की समिति ने संशोधित रिपोर्ट पेश की। इसमें समिति ने पांच वर्ष एमबीबीएस करने के बाद प्रैक्टिस करने के लिए अलग से एनएलई परीक्षा को उचित करार नहीं दिया है।
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समिति का मानना है कि देश में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है। साथ ही एमबीबीएस के बाद एनएलई और पीजी प्रवेश परीक्षा एकसाथ रखने से ज्यादात्तर अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा को तरजीह देंगे। इसलिए एनएलई के स्थान पर सरकार एमबीबीएस के ही अंतिम वर्ष परीक्षा में पेपर बढ़ा सकती है। चूंकि स्वास्थ्य राज्य से जुड़ा विषय है। इसलिए समिति ने परीक्षा कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार को ही देने ही सिफारिश की है। 
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डॉक्टरों की महापंचायत में होगा फैसला

To be a doctor, do not have to give separate examination

बता दें कि मेडिकल क्षेत्र में सुधार के लिए एमसीआई की जगह एनएमसी बनाने के लिए एक समिति बनाई गई थी, समिति की रिपोर्ट के बाद एनएमसी बिल तैयार किया गया। दिसंबर-2017 में इसे लोकसभा में पेश किया गया था। बिल के कुछ प्रावधानों पर निजी क्षेत्र के चिकित्सकों और एग्जिट एग्जाम पर स्टूडेंट्स को आपत्ति थी इसके बाद बिल को पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी को भेज दिया गया था।

जहां विभिन्न संगठन, सरकार और एमसीआई से चर्चा के बाद 136 पन्नों की संशोधन रिपोर्ट तैयार की है। लेकिन डॉक्टरों ने इस रिपोर्ट को नकार दिया है। 

समिति की रिपोर्ट आने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेड़कर ने कहा कि जिन बिंदुओं पर संशोधन की मांग रखी गई थी। स्थायी समिति ने उनमें से कई बिंदुओं पर संशोधन नहीं किया है। 25 मार्च को दिल्ली में देश भर के लाखों डॉक्टरों की महापंचायत होने वाली है। उसी में स्थायी समिति की इन सिफारिशों को लेकर डॉक्टर फैसला करेंगे। उन्होंने इस रिपोर्ट पर संतुष्टि नहीं जताई है। 

नियमों को ही समिति ने घुमा दिया
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विवेक चौकसे ने बताया कि एनएमसी बिल के खिलाफ लगातार विरोध चल रहा है। एमबीबीएस के बाद एनएलई परीक्षा गलत फैसला था। उम्मीद थी कि समिति इस पर उचित संज्ञान लेगी। लेकिन अंतिम वर्ष में पेपर बढ़ाना और राज्यों को स्वतंत्र अधिकार देने की सिफारिश करना गलत है। उन्होंने मांग की है कि एमबीबीएस करने के बाद किसी भी तरह की परीक्षा नहीं रखी जाए। 

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