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Delhi : जहां बनना है अस्पताल वहां भरा हुआ है पानी, अब तकनीक में बदलाव और लागत बढ़ने से अटका निर्माण

Sun, 04 Feb 2024 05:25 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 Feb 2024 05:25 AM IST
सार

जिस जगह पर अस्पताल का निर्माण किया जाना है, वहां जलभराव की वजह से भूजल स्तर अधिक है। ऐसे में लोकनिर्माण विभाग ने निर्माण की तकनीक में बदलाव किया है। इस वजह से निर्माण की लागत बढ़ गई है।

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The place where the hospital is to be built is filled with water
यहीं बनना है अस्पताल... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

निर्माण तकनीक में बदलाव और लागत बढ़ने से किराड़ी में अस्पताल बनाने की योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। जिस जगह पर अस्पताल का निर्माण किया जाना है, वहां जलभराव की वजह से भूजल स्तर अधिक है। ऐसे में लोकनिर्माण विभाग ने निर्माण की तकनीक में बदलाव किया है। इस वजह से निर्माण की लागत बढ़ गई है। अब आगामी दिल्ली के बजट में इस परियोजना को पंख लगने की उम्मीद है।

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लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआत में अस्पताल का निर्माण सामान्य फाउंडेशन पर होना था, लेकिन जलभराव और अधिक भूजल होने के कारण अब पाइल फाउंडेशन पर इमारत बनेगी। इसके लिए अस्पताल के भवन का डिजाइन भी बदला जाएगा। इस वजह से निर्माण लागत बढ़ गई है। पाइल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) अपने ट्रैक बनाने के लिए पिलर बनाने में करता है।
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इसके तहत जमीन के अंदर 15 से 20 मीटर बोरिंग कर पिलर के ऊपर फाउंडेशन बनाया जाता है। दिल्ली सरकार की ओर से यहां 2.71 एकड़ क्षेत्र में 458 बेड के अस्पताल का निर्माण की योजना प्रस्तावित है। अस्पताल का निर्माण कार्य सितंबर 2021 में शुरू होना था और वर्ष 2022 के फरवरी में पूरा किया जाना था। इस अस्पताल में इमरजेंसी, ओपीडी और वार्ड सहित ऑक्सीजन टैंक जैसी सभी सुविधाएं होने की बात कही गई है।
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लाखों लोगों को होगा फायदा
लाखों की आबादी वाले किराड़ी क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। वर्तमान में लोग कई किमी दूर मंगोलपुरी के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल, पूंठ खुर्द स्थित महर्षि वाल्मीकि अस्पताल और रोहिणी स्थित डाॅ. अंबेडकर अस्पताल में जाते हैं। यह तीनों अस्पताल काफी दूर हैं। इन अस्पतालों पर पहले से ही मरीजों की भरमार रहती है। ऐसे में इस अस्पताल के शुरू हो जाने से लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।

इस वर्ष चार अस्पताल हो जाएंगे तैयार
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष चार नए अस्पताल बनकर तैयार हो जाएंगे। चारों अस्पताल 4360 बेड के हैं। इनका वर्तमान में निर्माण कार्य 50 से 90 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है। काेरोना के दौरान इन अस्पतालों का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। यह अस्पताल में अप्रैल से दिसंबर तक अलग-अलग महीने में तैयार होंगे।


बन रहे अस्पतालों में ज्वालापुरी, मादीपुर, हस्तसाल 1000 बेड और सिरसपुर में 1360 बेड का अस्पताल है। निर्माण कार्य की स्थिति को देखें तो ज्वालापुरी अस्पताल का निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। यहां काम अंतिम चरण में हैं। मादीपुर अस्पताल का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत, हस्तसाल अस्पताल का निर्माण कार्य 50 प्रतिशत और सिरसपुर अस्पताल का निर्माण कार्य 75 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।

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