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डॉक्टर के हौसले के आगे छोटी पड़ी उम्र की सीमा, महामारी को भी दे चुके हैं मात डॉ. आचार्य

अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Nov 2020 05:08 AM IST

सार

  • 53 साल की उम्र में शुरू किया दौड़ना
  • सात साल में 60 से ज्यादा मैराथन में लिया हिस्सा
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डॉक्टर राजेश आचार्य...
डॉक्टर राजेश आचार्य... - फोटो : amar ujala

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विस्तार

अगर जीवन में कुछ करने की चाहत हो तो व्यक्ति किसी भी उम्र में बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है। इस बात को सच साबित किया है सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉक्टर राजेश आचार्य ने। उन्होंने 53 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया और 60 साल की उम्र तक 60 से ज्यादा मैराथन में भाग लिया। इसके जरिए वे लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं।
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दिल्ली के पटेल नगर निवासी डॉ. राजेश (60) बताते हैं कि 50 साल की उम्र में उन्हें खुद को फिट रखने का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने रोज सुबह सैर पर जाना शुरू किया। शुरुआत में काफी परेशानी होती थी। एक किलोमीटर दौड़ना भी मुश्किल होता था। कई दिनों तक शरीर में दर्द में रहता था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कई डॉक्टरों ने उन्हें इस उम्र में इतनी शारीरिक गतिविधियों को करने के लिए मना किया, परंतु अपनी इस ललक के आगे उम्र का बंधन नहीं आने दिया। 


तीन साल तक उन्होंने रोजाना एक से पांच किलोमीटर तक दौड़ लगाई। 53 साल की उम्र में दिल्ली में हुई 21 किलोमीटर की अपनी पहली मैराथन में भाग लिया, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद उनका हौसला बढ़ गया। वह दिल्ली-एनसीआर में होने वाली सभी मैराथन में दौड़े और उन्हें पूरा भी किया। डॉ. राजेश बताते हैं कि वह हर रविवार 21 किलोमीटर दौड़ते हैं। इससे फेफड़ों की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है। साथ ही दिल की बीमारियों से भी निजात मिलती है।

कोरोना संक्रमण को दी मात
डॉक्टर ने बताया कि वह कोरोना संक्रमित होकर खुद ही ठीक हो चुके हैं। 60 साल की उम्र में भी उन्हें इस बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं आया था। एंटीबॉडी जांच कराने के बाद उन्हें पता चला कि वह भी इस बीमारी से संक्रमित हो चुके थे। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों से जरूर जुड़ा रहना चाहिए। खासकर इस दौर में जहां कोविड जैसी महामारी के अलावा लोग बढ़ते प्रदूषण से भी जूझ रहे हैं। 

स्ट्रोक से भी बचाव
डॉ. राजेश ने कहा कि कोरोना के इस दौर में स्ट्रोक की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। इस समय चार में से एक व्यक्ति को इस बीमारी सेे पीड़ित होने का खतरा है। रोजाना कसरत या किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों से इस बीमारी को रोका जा सकता है।
 

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