दिल्ली में दरिंदगी की हदें पार: किशोरी को एक साल तक कैद रखा, प्रेस और चाकू से दागा; पढ़ें पूरी आपबीती
दिल्ली के शाहीन बाग में एक 16 वर्षीय किशोरी को बंधक बनाकर गर्म प्रेस व चाकू से जलाया गया। पुलिस व एसडीएम ने उसे मुक्त कराया है, महिला साबिया गिरफ्तार हुई।
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दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के शाहीन बाग थाना क्षेत्र स्थित अबुल फजल एन्क्लेव-2 में रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 16 वर्षीय किशोरी को करीब एक साल तक बंधक बनाकर रखा गया। काम नहीं करने पर उसे शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती थीं। उससे प्रतिदिन 18 से 20 घंटे तक काम कराया जाता था।
किशोरी को सुबह छह बजे से रात दो बजे तक घरेलू काम में लगाया जाता था। उसे गर्म प्रेस और चाकू से जलाया गया तथा कई-कई दिनों तक भूखा रखा गया। इतना ही नहीं, उसे अपने माता-पिता से मिलने तक नहीं दिया जाता था। कालकाजी के एसडीएम, स्वयंसेवी संस्थाओं और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में किशोरी को मुक्त कराया गया। दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने घटना की पुष्टि की है। इस मामले एक महिला साबिया को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किशोरी के शरीर पर चोटों के कई निशान मिले हैं। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के निर्देश पर उसे एम्स में भर्ती कराया गया है। शाहीन बाग थाना पुलिस ने कालकाजी के एसडीएम की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन को एक किशोरी से जुड़ी शिकायत मिली।
नाबालिग पिछले करीब एक साल से शाहीन बाग स्थित एक घर में घरेलू काम कर रही थी। शिकायत मिलने के बाद कालकाजी के एसडीएम को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद तीन नवंबर को एसडीएम कार्यालय के निर्देश पर श्रम विभाग और शाहीन बाग थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी के घर पर छापा मारा। जांच में पता चला कि मकान मालिक किशोरी को मुरादाबाद भेज चुका था। इसके बाद उसे मुक्त कराया गया।
सीडब्ल्यूसी के सामने पीड़ित किशोरी ने जो खुलासे किए, उन्हें सुनकर हर कोई सन्न रह गया। उसने बताया कि उसकी पीठ, हाथों और कूल्हों को कई बार गर्म प्रेस से जलाया गया। गर्म चाकू से भी उसे दागा गया। पुलिस के अनुसार, उसके शरीर पर कई घाव और पुरानी चोटों के निशान मिले हैं। पूरी पीठ पर जलने के निशान हैं। सिर में भी कई गहरे घाव हैं। उसके चेहरे को भी कई जगहों से नोंचा
गया था।
पीड़िता ने बताया कि उसे लगातार तीन दिनों तक भूखा रखा गया और पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। जरा सी गलती होने पर घर की मालकिन उसके साथ मारपीट करती थी। चोट लगने पर उसे डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय मेडिकल स्टोर से दवाएं लाकर दी जाती थीं।
माता-पिता से बात नहीं करने देती थी
पीड़िता को उसके माता-पिता से पूरी तरह दूर रखा गया था। जब भी वे अपनी बेटी से बात कराने की मांग करते, महिला कोई न कोई बहाना बना देती थी। पूरे एक साल में मुश्किल से दो-तीन बार ही उसकी फोन पर बात कराई गई। इस दौरान भी सायरा का चेहरा ढक दिया जाता था, ताकि उसके माता-पिता चेहरे पर लगी चोटों को न देख सकें। उसे धमकी दी गई थी कि यदि उसने किसी को भी यातनाओं के बारे में बताया तो उसे मारकर बोरे में भरकर फेंक दिया जाएगा और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगेगी।
सीडब्ल्यूसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किशोरी को एम्स में भर्ती कराने का निर्देश दिया। समिति ने कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि इतनी यातनाएं सहने के बाद भी बच्ची जीवित है। फिलहाल शाहीन बाग थाना पुलिस आरोपी महिला की तलाश कर रही है। शनिवार शाम तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी।