Delhi: यौन शोषण करने वाले सौतेले पिता को 20 साल की कैद, सुनवाई के दौरान पीड़िता- मां और बहन ने बदल दी थी गवाही
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता की 20 साल की सजा बरकरार रखी है। हालांकि मुकदमे के दौरान पीड़िता, पीड़िता की मां और अन्य गवाह मुकर गए थे।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता की 20 साल की सजा बरकरार रखी है। हालांकि मुकदमे के दौरान पीड़िता, पीड़िता की मां और अन्य गवाह मुकर गए थे। न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने फैसले में पॉस्को एक्ट की धारा 6 के तहत 20 साल की कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक शिकायत, बयान और मेडिकल सबूतों से अपराध साबित होता है, भले ही गवाह अदालत में मुकर गए हों, लेकिन मामला संगीन है।
मामला 2016 का है, जब 25 मार्च को होली की रात में आरोपी जाहिद ने अपनी नाबालिग सौतेली बेटी (उम्र 12 साल से कम) का जबरन यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में दी थी। पीड़िता ने सुबह अपनी बड़ी बहन को सारी को घटना बताई, जिसने मां को सूचित किया। इसके बाद अमर कॉलोनी थाने में एफआईआर दर्ज हुई। ट्रायल कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, साकेत) ने 18 दिसंबर 2021 को जाहिद को दोषी ठहराया और 3 मई 2023 को सजा सुनाई। अदालत ने माना कि पीड़िता के साथ दुष्कर्म हुआ है। डीएनए सबूतों से आरोपी की संलिप्तता साबित हुई। हालांकि, ट्रायल के दौरान पीड़िता, मां और बहन मुकर गईं और किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी बताया, लेकिन अदालत ने इसे दबाव का नतीजा माना।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इंफ्लुएंसर संदीपा विर्क को दी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और एक्ट्रेस संदीपा विर्क को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जमानत दी है। यह मामला लगभग 6 करोड़ रुपये की ठगी और फर्जी ब्यूटी प्रोडक्ट्स बेचने से जुड़ा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया। 2016 में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ी हैं, जो पंजाब पुलिस में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोपों के तहत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुख्य आरोपी अमित गुप्ता और संदीपा विर्क सहित अन्य लोगों ने उन्हें फिल्म में लीड रोल देने के बहाने करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी की।
पूर्व विधायक का बेटा मनजीत खरब दुष्कर्म मामले में बरी
तीस हजारी कोर्ट ने पूर्व विधायक रणबीर सिंह खरब के बेटे मनजीत खरब को बलात्कार और धमकी के एक मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा। यह फैसला 23 दिसंबर 2025 को सुनाया गया, जिसमें न्यायाधीश विशाल पहुजा ने मनजीत को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। मामला 2020 का है, जब पश्चिम विहार वेस्ट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि मनजीत ने फेसबुक पर उनसे दोस्ती की और शादी का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। अदालत ने अभियोजन के सबूतों में विरोधाभास पाया और मनजीत को बरी कर दिया।
फर्जी आरबीआई ईमेल से लाखों की ठगी, दोषी को सिर्फ जुर्माना
राउज एवेन्यू कोर्ट ने साइबर ठगी के एक पुराने मामले में आरोपी मोहम्मद गुलाम अंसारी को दोषी ठहराया है। यह ठगी साल 2012 में फर्जी आरबीआई ईमेल से हुई थी, जिसमें देशभर के लोगों से लाखों रुपये ठगे गए। अंसारी ने खुद कोर्ट में अपना गुनाह कबूल कर लिया था। कोर्ट ने उसे जेल की सजा के बजाय पहले से काटी गई हिरासत की अवधि को सजा माना। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी की अदालत ने आरोपी को जेल भेजने के बजाय 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
साकेत कोर्ट ने मारपीट, रास्ता रोकने और जान से मारने की धमकी के मामले में दो आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी देवांशी जन्मेजा ने सुनाया। यह मामला साल 2018 में गोविंदपुरी थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता अफजल ने पुलिस में आरोप लगाया था कि इमरान और राहुल ने उनके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।
रोहिणी कोर्ट ने शस्त्र अधिनियम के एक मामले में आरोपी देवेंद्र उर्फ धर्मेंद्र को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि सिर्फ पुलिस गवाहों के बयान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह मामला साल 2019 का है। पुलिस का दावा था कि आरोपी के पास से बिना लाइसेंस एक पिस्तौल बरामद हुई थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि जिस जगह से पिस्तौल मिलने की बात कही गई, वह सार्वजनिक स्थान था। कमियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
द्वारका कोर्ट ने दुकान में चोरी, अवैध प्रवेश और धमकी में आरोपी वीरेंद्र कुमार शर्मा को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को ठोस सबूतों के साथ साबित नहीं कर सका। यह मामला जनकपुरी थाना क्षेत्र का है, जिसमें आरोपी पर दुकान में जबरन घुसकर चोरी करने, दुकानदार को धमकी देने और सबूत मिटाने के आरोप लगे थे। मामला काफी पुराना था और इसकी सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हरजोत सिंह औजला ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य इतने मजबूत नहीं हैं कि आरोपी को दोषी ठहराया जा सके। अभियोजन पक्ष की कहानी में कई खामियां सामने आईं, जिससे आरोप संदेह से परे साबित नहीं हो पाए। अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
तीस हजारी कोर्ट ने वर्ष 2018 के एक मारपीट के मामले में दो युवकों को बरी कर दिया है। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट अंकुर पंघाल की अदालत ने सुनाया। पुलिस के अनुसार, आरोप था कि महेश मीणा उर्फ महेश बागड़ी और जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू ने नेहरू विहार के एक पार्क के पास श्याम नामक व्यक्ति को रोका, उससे गाली-गलौज की और धारदार हथियार से घायल किया। इस संबंध में मामला दर्ज किया गया था। लेकिन, अदालत में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता श्याम, जो इस मामले का मुख्य गवाह था, अपने पहले बयान से मुकर गया। उसने अदालत को बताया कि आरोपियों के साथ केवल कहासुनी हुई थी और किसी तरह की मारपीट या चोट नहीं लगी थी। अदालत ने कहा कि मुख्य गवाह के बयान बदलने के बाद अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका। सबूतों की कमी को देखते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने चोरी के एक मामले में आरोपी संदीप को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि सबूतों के अभाव में आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मामला वर्ष 2021 का है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर विश्वास नगर इलाके में राम प्रसाद नामक व्यक्ति के साथ जबरदस्ती कर उसका मोबाइल चुराने की कोशिश का आरोप था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता और मुख्य गवाह राम प्रसाद बार-बार समन जारी होने और डीसीपी के माध्यम से नोटिस भेजे जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए।