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Delhi NCR News: ईएमआई मॉडल पर लगेंगी स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें, प्रदर्शन के बाद ही होगा भुगतान
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राजधानी में स्ट्रीट लाइटें ईएमआई मॉडल पर लगेंगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ऐसा भुगतान ढांचा तैयार किया है, जिसमें ठेकेदारों को मासिक किस्त तभी मिलेगी जब नई स्मार्ट एलईडी लाइटें तय मानक 40 लक्स रोशनी के साथ पूरी तरह चालू रहें। अभी तक सरकार इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के लिए अग्रिम भुगतान करती थी। नए मॉडल में पहले प्रदर्शन, फिर भुगतान की व्यवस्था होगी।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर औसत रोशनी 10-15 लक्स है, जबकि फ्लाईओवर और हाईवे के लिए 40 लक्स आदर्श माना जाता है। प्रस्ताव के तहत करीब 1 लाख पुरानी हाई-प्रेशर सोडियम वेपर लाइटों को ऊर्जा-कुशल स्मार्ट एलईडी से बदला जाएगा। सभी लाइटें एससीएडीए आधारित निगरानी तंत्र से जुड़ी होंगी, जिससे केंद्रीय डैशबोर्ड पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, फॉल्ट डिटेक्शन और 24 घंटे के भीतर खराब लाइट बदलने की बाध्यता सुनिश्चित होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 400 करोड़ रुपये है। अधिकारियों के अनुसार, एलईडी में बदलाव से बिजली और रखरखाव पर सालाना लगभग 31.53 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह राशि अन्य बुनियादी ढांचा और कल्याण परियोजनाओं में निवेश के लिए जगह बनाएगी। प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के समक्ष रखा जाएगा और मंजूरी के बाद 10–15 दिनों में टेंडर जारी करने की योजना है। इस मॉडल का बड़ा संदेश शासन-प्रणाली में बदलाव है। कंपनियां केवल आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि जवाबदेही की साझेदार होंगी। जनता भी डैशबोर्ड पर अपने क्षेत्र की लाइटों की स्थिति देख सकेंगे और शिकायत भी कर सकेंगे।
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नई दिल्ली।
राजधानी में स्ट्रीट लाइटें ईएमआई मॉडल पर लगेंगी। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने ऐसा भुगतान ढांचा तैयार किया है, जिसमें ठेकेदारों को मासिक किस्त तभी मिलेगी जब नई स्मार्ट एलईडी लाइटें तय मानक 40 लक्स रोशनी के साथ पूरी तरह चालू रहें। अभी तक सरकार इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के लिए अग्रिम भुगतान करती थी। नए मॉडल में पहले प्रदर्शन, फिर भुगतान की व्यवस्था होगी।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की कई मुख्य सड़कों पर औसत रोशनी 10-15 लक्स है, जबकि फ्लाईओवर और हाईवे के लिए 40 लक्स आदर्श माना जाता है। प्रस्ताव के तहत करीब 1 लाख पुरानी हाई-प्रेशर सोडियम वेपर लाइटों को ऊर्जा-कुशल स्मार्ट एलईडी से बदला जाएगा। सभी लाइटें एससीएडीए आधारित निगरानी तंत्र से जुड़ी होंगी, जिससे केंद्रीय डैशबोर्ड पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, फॉल्ट डिटेक्शन और 24 घंटे के भीतर खराब लाइट बदलने की बाध्यता सुनिश्चित होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 400 करोड़ रुपये है। अधिकारियों के अनुसार, एलईडी में बदलाव से बिजली और रखरखाव पर सालाना लगभग 31.53 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह राशि अन्य बुनियादी ढांचा और कल्याण परियोजनाओं में निवेश के लिए जगह बनाएगी। प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के समक्ष रखा जाएगा और मंजूरी के बाद 10–15 दिनों में टेंडर जारी करने की योजना है। इस मॉडल का बड़ा संदेश शासन-प्रणाली में बदलाव है। कंपनियां केवल आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि जवाबदेही की साझेदार होंगी। जनता भी डैशबोर्ड पर अपने क्षेत्र की लाइटों की स्थिति देख सकेंगे और शिकायत भी कर सकेंगे।
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