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सिग्नेचर ब्रिज उद्घाटन विवाद: तिवारी पड़े अकेले, बिना बुलाए जाने पर भाजपा में ही उठ रहीं अंगुलियां

Wed, 07 Nov 2018 04:31 AM IST
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Nov 2018 04:31 AM IST
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Signature Bridge inauguration controversy Manoj Tiwari got alone in whole party
मनोज तिवारी
सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से कथित मारपीट के बाद एक बार फिर भाजपा की एकजुटता की पोल खुल गई। प्रदेश स्तर के नेताओं ने मात्र बयानबाजी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।  
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उनके साथ एक भी बड़ा नेता कंधे से कंधा मिला कर खड़ा नजर नहीं आ रहा। भाजपा में पहले से ही सभी नेता अपनी-अपनी ढ़फली बजा रहे हैं। इस मुद्दे पर मनोज तिवारी पूरी पार्टी में अकेले पड़ गए। 
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तिवारी के अध्यक्ष बनने के बाद से ही प्रदेश स्तर के नेता एक-दो मौकों  को छोड़कर मंच साझा करने से बचते रहे हैं। सीलिंग, आप सरकार को घेरने के मुद्दे सहित अन्य मसलों पर भी सभी नेताओं ने अलग ही मोर्चा खोला हुआ है। 
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केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता, भाजपा के अन्य तीन विधायक के अलावा अन्य प्रदेश स्तर के नेता अपने स्तर पर राजनीति कर रहे हैं। वे प्रदेश कार्यालय में नजर तक नहीं आते।   पूर्वांचलियों के मामले में भी भाजपा बैकफुट पर आ गई थी। कांग्रेस व आप ने उसे घेरने में कोई कसर नहीं छेड़ी। 

प्रदर्शन में भी कोई बड़े नेता नहीं पहुंचे

सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के दौरान मनोज तिवारी बिना बुलाए ही समारोह में गए। समारोह में दोनों पक्षों के बीच काफी गर्मागर्मी हुई। आखिर उकसावे में आकर विधायक अमानतुल्ला खान ने उन्हें धक्का देकर पूर्वांचलियों के मुद्दे पर पूर्णविराम लगा दिया। उधर प्रदेश अध्यक्ष पर कथित हमले के विरोध में भाजपा ने मुख्यमंत्री निवास पर प्रदर्शन कर रोष जताया, लेकिन प्रदर्शन में कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा।  

‘उद्घाटन में जाने से पहले नेताओं से राय लेना चाहिए था’
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि  समारोह में उन्हें धक्का मारा गया तो एक सांसद को नहीं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष को धक्का मारा गया है। ऐसे में पूरी पार्टी असहज स्थिति में पहुंच गई है। उन्होंने माना कि राजधानी में होने वाले समारोह में दूसरी पार्टी के नेताओं को न बुलाने का विवाद चल ही रहा है, ऐसे में यदि उन्हें सांसद के नाते जाना ही था तो कम से कम पार्टी नेताओं से राय कर लेते। 
 
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