'अब राजनीति में आने की मेरी उम्र नहीं रही'
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राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात के उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद एक बार फिर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक विवादास्पद बयान दिया है। उनका कहना है कि अगर दिल्ली में चुनाव होते हैं तो इसके परिणाम पिछली बार के विधानसभा के नतीजों की तरह ही होंगे।
हाल ही में शीला केरल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर दिल्ली वापस आई हैं। उनका कहना है कि अगर दिल्ली में अभी चुनाव कराए जाते हैं तो किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नही मिलेगा।
भले ही उप चुनावों के परिणाम आए अभी हफ्ते भर भी नहीं हुए हैं लेकिन इतना समय भी राजनीति में काफी अहम होता है। इस ओर इशारा करते हुए शीला ने कहा कि राजनीति में एक हफ्ते का समय भी बहुत लंबा होता है।
'धार्मिक मुद्दों को उठाने के चलते हारी भाजपा'
इस छोटे से समय में भी बड़ा बदलाव संभव है। लोगों के मूड के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। हालांकि उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि चुनाव के परिणाम क्या होंगे इसका पता तो चुनाव होने पर ही चलेगा।
कहा ये भी जा रहा है कि उपचुनाव में भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह धार्मिक मुद्दों का उठाना था। वोटरों ने इस तरह की राजनीति को पूरी तरह से खारिज कर दिया। शीला दीक्षित ने भाजपा को सुझाव देते हुए कहा है कि पार्टी को चुनाव से पहले कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
शीला ने कहा कि सभी पार्टियों को राज्य स्तर पर अपने काम को तेजी देनी चाहिए। इसके साथ ही नेताओं को अपनी उपलब्धियों के बारे में भी लोगों को बताना होगा। पार्टी को लोगों से जुड़ना चाहिए, उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और उसके समाधान की कोशिश करनी चाहिए।
अब नहीं करेंगी राजनीति में वापसी
अनुभवी नेता शीला दीक्षित ने सभी नेताओं को सलाह देते हुए कहा कि भले ही हम अपने क्षेत्र से कितने भी सालों से जुड़े हों लेकिन हमें वहां की जनता से लगातार मिलते रहना चाहिए।
अपनी उम्र पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अब राजनीति में वापस आने की उनकी उम्र निकल चुकी है। उनका कहना है कि जनेरेशन गैप को खत्म करने के लिए जरूरी है कि अगली पीढ़ी के नेताओं को भी आगे बढ़ने का मौका दिया जाए।
जब उनसे विधानसभा में कांग्रेस की हार के बारे के पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महंगाई एक बड़ा मुद्दा था। मुझ पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए गए जिसमें से एक भी साबित नहीं हो पाए। दिल्ली के लोग 15 साल से एक ही सरकार से ऊब चुके थे और बदलाव चाहते थे।