अध्यक्ष बनाए जाने के बाद शीला दीक्षित ने जाहिर किए इरादे, बताई क्या है चुनौती
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कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनावों के ध्यान को रखकर शीला दीक्षित को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी, लेकिन उन्हें कई चुनौतियों से पार पाना होगा। दिल्ली में धरातल में पंहुची कांग्रेस को नई संजीवनी देने के साथ ही कांग्रेस-आप के बीच संभावित गठबंधन को लेकर उनकी अग्नि परीक्षा है। यह देखना है कि लोकसभा चुनावों में वे कहां तक गेमचेंजर बन कर उभरती हैं। शीला कड़क मिजाज की मानी जाती हैं और यही कारण है कि वे समय-समय पर विरोध के बावजूद लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद पर रहीं हैं और विरोधियों को पटकनी देती रही है।
शीला दीक्षित तीन बार मुख्यमंत्री जरूर रही लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से हार का सामना करना पड़ा था और इसी के बाद से उनको साइड लाइन कर दिया गया था। कुछ अरसा चुप बैठने के बाद उन्होंने बीमारी के बावजूद सक्रिय राजनीति से संन्यास नहीं लिया। वे हमेशा से ही पार्टी आलाकमान के नजदीक रही हैं और यही कारण है कि वे पुन: प्रदेश अध्यक्ष बनने के सफल रहीं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि शीला दीक्षित को पार्टी हाईकमान ने बड़ी जिम्मेदारी दी है और शीला दीक्षित ने प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के तुरंत बाद अपने इरादे भी जाहिर कर दिए। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता पार्टी को नए सिरे से दिल्ली में खड़ा करना है। वे पहले भी एक बार प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल चुकी हैं।
क्या है चुनौतियां
शीला के पास सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली में पार्टी को खड़ा करना ही है। वर्तमान में दिल्ली में कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है। कार्यकर्ताओं में जोश का अभाव है और इसके अलावा उनके सामने यह भी चुनौती है कि वे अपने स्तर पर पार्टी को लोकसभा चुनावों में कहां तक लेकर जाती हैं। मतदाताओं को पुरानी कांग्रेस से किस प्रकार जोड़ा जाएगा। आम आदमी पार्टी में गया वोट बैंक किस प्रकार वापस लाया जाएगा। जहां तक दिल्ली में टीम की बात है, तीन बार मुख्यमंत्री व एक बार प्रदेश अध्यक्ष रहने के कारण उन्हें कोई विशेष परेशानी आने वाली नहीं है। अधिकांश नेता उनके अधीन काम कर चुके हैं। मात्र वोटरों को वापस कांग्रेस में लाना व उनके विश्वास को जगाना ही एक चुनौती पूर्ण कार्य है।
कांग्रेस-आप के संभावित गठबंधन की चर्चाओं के बीच वे कहां तक पार्टी हाईकमान के फैसले को लागू करवा पाती है, यह देखना होगा। गठबंधन हुआ तो किस प्रकार कार्यकर्ताओं को समझाए जाए और नहीं हुआ तो किस प्रकार आप व भाजपा से मुकाबला करना भी उनके लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि शीला के अध्यक्ष बनने से आप के लिए परेशानी साबित हो सकती है। शीला के समय दिल्ली में विकास कार्य हुए, इसे हर दिल्लीवासी मानता है और शीला अपने द्वारा करवाए गए विकास कार्यो को लेकर दिल्ली सरकार को कहां तक घेरने के सफल होती है इस पर भी सभी की निगाह रहेगी।
रोजश लिलोठिया को मिली पदोन्नति
शीला दीक्षित के प्रदेश अध्यक्ष के बनने के साथ हाईकमान ने पूर्व विधायक देवेन्द्र यादव, यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रोजश लिलोठिया व पूर्व मंत्री हारूण युसूफ को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। इनमें से लिलोठिया को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में बड़ी पदोन्नति मानी जा रही है। लिलोठिया को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की विशेष कृपा से पदोन्नति मिली है वे उनके पीएस के राजू के घनिष्ठ बताए जाते हैं। वहीं, देवेन्द्र यादव बादली क्षेत्र से वर्ष 2008 व 2013 में विधायक रहे हैं और 2007 में पार्षद बने। जातिगत समीकरण को देखते हुए उन्हें यह पद मिला है। इसी प्रकार शीला के मंत्रिमंडल में रहे हारूण युसूफ कभी उनके नजदीकी रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। उन्हें भी जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिला है।
लोकसभा चुनाव के ध्यानार्थ कई नाम कटे
प्रदेश अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष की दौड़ में कई नेता थे। लोकसभा चुनाव के ध्यानार्थ उनका पत्ता कट गया। दरअसल पार्टी ने तय कर दिया था कि जो इस पद की दौड़ में रहेगा उसे लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलेगा। पूर्व मंत्री योगानंद शास्त्री इसी श्रेणी में है।
गठबंधन पर चुप्पी साधी
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली प्रथमिकता शीला ने दिल्ली में पार्टी को खड़ा करना बताया है। वहीं, आप से गठबंधन पर कोई सीधा जवाब न देते हुए कहा कि चर्चा मीडिया की है और अभी ऐसा कुछ नहीं है।
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गठबंधन न करने के कारण ही फूलका व माकन की कुर्सी गई: गुप्ता
शीला के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर विपक्ष के नेता विजेन्द्र गुप्ता ने कहा शीला दीक्षित को कांग्रेस-आप के गठबंधन के लिए लाया गया। गठबंधन का विरोध करने वाले आप नेता एचएस फूलका व पूर्व अध्यक्ष अजय माकन को अपनी कुर्सी खोनी पड़ी। कांग्रेस-आप एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोस्ती भी दोनों के बीच तो विरोध भी दोनों के बीच, यह दिलचस्प बात है।