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विरोध के बाद दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का यू-टर्न, नियुक्ति पत्र रद्द करने का आदेश वापस

Wed, 16 Oct 2019 11:05 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 16 Oct 2019 11:05 AM IST
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SDMC takes u turn on cancellation of posting of teachers took order back
फाइल फोटो

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की मंगलवार को हुई सदन की बैठक में शिक्षकों के नियुक्ति पत्र रद्द किए जाने के मुद्दे पर हंगामा हुआ। इस बीच एसडीएमसी ने शिक्षकों के नियुक्ति पत्रों को रद्द करने के आदेश को वापस ले लिया और मामले के सुलझने तक नियुक्ति पर रोक को बरकरार रखने की बात कही। इतना ही नहीं भाजपा पार्षदों ने केजरवाल हाय-हाय के नारे भी लगाए। सीएम केजरीवाल के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।

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सदन की अध्यक्षता दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की महापौर संगीता कांगड़ा ने की। दीपावली के मद्देनजर सदन की बैठक का एजेंडा सभी इलाकों की स्वच्छता पर आधारित था, लेकिन  महापौर के पहुंचते ही कांग्रेसी पार्षद दर्शना ने कैट के आदेश के बाद निगम द्वारा शिक्षकों के नियुक्ति पत्र रद्द किए जाने के मुद्दे को उठाया। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने भी इस मुद्दे को तूल दे दिया। कांग्रेसी पार्षदों ने सवाल उठाया कि केन्द्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण (कैट) के आदेश की प्रति जारी हुए बिना शिक्षकों के नियुक्ति पत्र किस आधार पर रद्द किए गए।
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भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्रों के अलग-अलग सेट में कुछ प्रश्र एक जैसे दिए गए तो उसके लिए सरकार ही जिम्मेदार है। यह सीएम की ही नाकामी है कि दिल्ली सरकार के दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की गलती की वजह से 3788 शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
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इन आरोपों के चलते आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भाजपा पार्षदों का विरोध करना शुरू कर दिया और फिर भाजपा व आप पार्षदों के बीच केजरीवाल हाय-हाय और केजरीवाल जिंदाबाद के नारे लगने लगे। नारेबाजी और हंगामे के बीच शिक्षकों की नियुक्ति पत्र रद्द किए जाने के विरोध में सीएम के खिलाफ भाजपा के निंदा प्रस्ताव को सदन में पारित कर दिया गया।

इस मुद्दे को लेकर निगम अधिकारियों की ओर से जवाब में कहा गया कि कैट की काउंसिल की ओर से दिए गए संदेश के आधार पर 14 अक्तूबर को शिक्षकों के नियुक्ति पत्र रद्द करने के लिए जारी किए गए नोटिस को 15 अक्तूबर की सुबह वापस ले लिया गया है और िनियुक्ति का मामला सुलझने तक होल्ड पर डाल दिया गया है। हालांकि शिक्षकों की नियुक्ति होने या ना होने के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया।


अस्थाई कर्मियों की पक्की नौकरी का भी उठा मुद्दा
सदन की बैठक में भाजपा पार्षदों ने पुराने अस्थाई कर्मचारियों को स्थायी करने का मुद्दा भी उठाया। इस मुद्दे के लेकर सभी दलों के पार्षदों ने प्रस्ताव रखा। पार्षदों ने मांग की कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी किया जाए, ताकि उन्हें भी अन्य स्थायी कर्मचारियों तरह बराबर काम के लिए बराबर मेहनताना मिल सके। इसके साथ ही सदन में अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और गंदगी समेत अन्य मामलों पर भी बहस हुई।

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