पार्षद से प्रदेश अध्यक्ष, पढ़िए पर्दे के पीछे की पूरी कहानी
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लगभग दो महीने तक चली तलाश के बाद आखिरकार दिल्ली प्रदेश भाजपा को अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त चेहरा मिल ही गया।
प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर हर्षवर्धन के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद से ही इस पद के लिए सही उत्तराधिकारी की तलाश चल रही थी जो आखिरकार एक ऐसे नाम पर रुकी है जिसे आरएसएस की ओर से भी हरी झंडी दी जा चुकी है।
दिल्ली प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष मालवीय नगर से पार्षद सतीश उपाध्याय होंगे।
दिल्ली भाजपा में पहली बार हुआ है ऐसा
दिल्ली के मालवीय नगर से निगम पार्षद सतीश उपाध्याय (50) को दिल्ली प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। उपाध्याय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।
दक्षिण निगम में स्थायी समिति के अध्यक्ष उपाध्याय पहली बार पार्षद चुनकर आए हैं। दिल्ली में पहली बार पंजाबी और वैश्य समुदाय से हटकर किसी ब्राह्मण को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सतीश उपाध्याय का कहना है कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका निर्वाह करने की पूरी कोशिश करेंगे।
संघ ने लगाया सतीश के नाम पर मुहर
सतीश उपाध्याय को पार्टी का अध्यक्ष चुनने के बाद भाजपा ने अपनी ही एक परिपाटी को तोड़ दी है। दिल्ली में आजतक कोई भी प्रदेश अध्यक्ष दिल्ली से बाहर का नहीं रहा है।
वैसे तो सतीश उपाध्याय लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं पर वह मूलतः उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। सतीश के अध्यक्ष बनने से पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनाव में दिल्ली में रह रहे यूपी के लोगों को पार्टी की ओर खींचने में भी मदद मिलेगी।
कई दिग्गजों नामों के बीच सतीश उपाध्याय के प्रदेश अध्यक्ष बनने का कारण लोग आरएसएस को बता रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि सतीश का नाम संघ ने ही पास किया है। सतीश का संघ से बहुत लंबा रिश्ता है। बीजेपी में शामिल होने से पहले से ही वो संघ कार्यकर्ता रहे हैं।
पार्षद से बने प्रदेश अध्यक्ष
आरएसएस से भाजपा में आए सतीश उपाध्याय को 2002 में दिल्ली यूथ विंग का अध्यक्ष चुना गया था। 2012 में उन्होंने अपना पहला नगर निगम चुनाव लड़ा था और निगम के शिक्षा कमिटी के चेयरमैन नियुक्त किए गए थे।
2013 में उन्हें दक्षिणी नगर निगम के स्थायी समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। सतीश ने अपनी इस नई जिम्मेदारी के बारे में कहा कि वो पार्टी के बहुत आभारी हैं कि उन्हें ये जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कहा जा रहा है कि निगम से जुड़े होने के कारण आगामी चुनाव में भाजपा के निगम में किए गए कामों को जनता तक पहुंचाने के लिए वो एक बेहतरीन विकल्प हैं। इस समय भाजपा को चुनाव के मद्देनजर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने में सतीश एक अहम भूमिका निभाएंगे। शायद यही वो कारण है जिसके चलते उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विरोधियों की वजह से बढ़ा दबाव
उपाध्याय ने कहा कि दिल्ली की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किए गए कार्यों से अवगत कराएंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर दिल्ली की जनता के लिए काम करेंगे।
डॉ. हर्षवर्धन के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद से ही दिल्ली भाजपा की कमान किसी और को देने की चर्चा तेज हो गई थी। मंत्री बनने के बाद हर्षवर्धन की व्यस्तता भी ज्यादा बढ़ गई जिस कारण दिल्ली में संगठन का काम काफी प्रभावित हो रहा था।
वहीं, कांग्रेस और आप के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भी पार्टी हाईकमान पर नए मुखिया को चुनने का दबाव बढ़ गया था।