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जिंदगी और दुनियादारी से निराश वृद्धा को RTI ने दिलाई पेंशन

Sat, 09 Apr 2016 02:47 PM IST
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित कुमार निरंजन/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 09 Apr 2016 02:47 PM IST
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rti finally gives justice to old lady she gets pension
सुम‌ित्रा देवी - फोटो : अम‌ित कुमार न‌िरंजन

सरकारी महकमे की कारिस्तानियों के चलते उनकी वृद्घा पेंशन बंद हो चुकी थी। जब बटुए खाली हो रिश्ते भी दरकने लगते हैं। कुछ दिनों बाद बच्चों ने भी उन्हें घर से निकाल दिया।

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जब किसी ने नहीं सुनी तो मंदिर को अपना ठिकाना बनाया और भीख मांग कर चार साल तक गुजारा करना पड़ा। 72 साल की सुमित्रा देवी लगभग जिंदगी और दुनियादारी से हताश हो चुकी थी। तब आरटीआई कुछ इस तरह एक वृद्घा की मददगार बनी। जिसके जरिए दिल्ली सरकार को उनकी रुकी हुई पेंशन जारी करनी पड़ी।
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दक्षिणी दिल्ली स्थित लाल गुम्बद इलाके में एक स्लम बस्ती है। इस इलाके में कैंप लगाने पहुंचे सतर्क नागरिक संगठन के कार्यकर्ताओं को सुमित्रा देवी एक मंदिर में अस्वस्थ लेटी हुई मिली थी।

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अफसर लगे धमकाने

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बातचीत में इन्होंने आपबीती बताई कि कैसे दिल्ली सरकार ने बिना बताए इनकी वृद्घा पेंशन(अप्रैल, 2012) में बंद कर दी थी। एनजीओ की मदद से सुमित्रा देवी ने महिला एवं बाल विकास विभाग (दिल्ली सरकार) में आरटीआई लगाई।

इसके बाद शुरू हुआ विभाग के अफसरों द्वारा सुमित्रा को धमकाने का सिलसिला, जब वे बुजुर्ग की हिम्मत नहीं तोड़ पाए तब विभाग कोर्ट पहुंच गया। वहां पर भी विभाग को मुंह की खानी पड़ी।

चार साल संघर्ष के बाद सुमित्रा की जीत हुई। हाईकोर्ट की फटकार के बाद विभाग ने फरवरी माह में सुमित्रा को 43,500रुपए की पेंशन जारी कर दी। पेंशन आने के बाद अब सुमित्रा को फिर से उनके परिजनों ने अपना लिया है।

तब सीआईसी और कोर्ट ने फटकारा

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कोर्ट - फोटो : demo pics

सतर्क नागरिक संगठन की सदस्या अमृता जौहरी ने बताया कि जब विधवा पेंशन प्राप्त करने वाली महिला की उम्र 60 साल से ऊपर हो जाती है तब उसे ये मदद राशि स्वतः वृद्घा पेंशन में बदल जाती है।

इसके लिए किसी भी औपचारिकता की जरूरत नहीं होती है। सुमित्रा देवी ने जून 2013को आरटीआई आवेदन लगाया। जवाब से संतुष्ठ न होने पर जुलाई 2013 में पहली अपील और सीआईसी में अगस्त 2013में दूसरी अपील लगाई गई।

सीआईसी (सितंबर, 2014) ने महिला एवं बाल विकास विभाग को आदेश दिया कि वे सुमित्रा को तुरंत 29 माह की पेंशन राशि 43,500 रुपए दें और इस बात के लिए विभाग को फटकार लगाई कि आखिर उन्होंने महिला को सूचित किए बगैर पेंशन क्यों बंद कर दी। सीआईसी के बार-बार आदेश के बाद भी विभाग ने सुमित्रा को पेंशन नहीं दी।

इसके बाद सीआईसी ने विभाग के पीआईओ पर 25 हजार का जुर्माना लगा दिया। विभाग सीआईसी के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2015 को विभाग के खिलाफ आदेश देते तुरंत सुमित्रा देवी को 43500 रुपए की पेंशन देने का आदेश दिया। हालांकि हाईकोर्ट ने 25 हजार का जुर्माना माफ कर दिया।

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