फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   RSS is re-writing the indian history.

RSS बदल देगा इतिहास, प्रोजेक्ट का खुलासा

Mon, 18 Aug 2014 07:16 PM IST
Updated Mon, 18 Aug 2014 07:16 PM IST
विज्ञापन
RSS is re-writing the indian history.

2025 में अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मनाने जा रहे राष्ट्रीय सेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीय इतिहास का एक नया संस्करण दुनिया के सामने पेश करने का फैसला किया है।

विज्ञापन


आरएसएस ने दस साल के प्रोजेक्ट की शुरूआत की है जिसका मकसद पुराणों पर आधारित भारतीय इतिहास लिखना है। संघ ने अपने इस प्रोजेक्ट को 'पुराणार्न्तगत इतिहास' नाम दिया है।
विज्ञापन


इस लेखन की खास बात यह होगी कि इसमें देश के 670 जिलों और 600 जनजातियों के इतिहास को भी लिखा जाएगा।

आगे जानिए क्यों खास होगा आरएसएस का यह इतिहास

साभार: इंडियन एक्सप्रेस

गुजरात से होगी इसकी शुरूआत

RSS is re-writing the indian history.

अपने इस उद्देश्य को अमली जामा पहनाने के लिए आरएसएस से जुड़ी संस्‍था अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना (ABISY) ने आगामी 22 से 24 ‌अगस्त के बीच गुजरात के पालमपुर में एक वर्कशॉप का आयोजन किया है। इस वर्कशॉप में विभिन्न विश्वविद्यालयों के 100 इतिहासकारों को आमंत्रित किया गया है।

इतिहास लेखन के अपने इस प्रयास को प्रोत्साहित करने के लिए अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने दिल्ली के केशव कुंज स्थित आरएसएस मुख्यालय में भारतीय पुराण अध्ययन संस्‍थान की भी स्‍थापना की है।

हर जिले का भी होगा इतिहास

RSS is re-writing the indian history.

संघ प्रचारक बालमुकुंद पाण्डे के मुताबिक, 'आरएसएस इतिहास को सही परिदृश्य में देखना चाहता है। इतिहास महज इतिहास है और भारतीय इतिहास का मुख्य स्रोत पुराण ही है।' आरएसएस के वरिष्ठ नेताओं की मध्य प्रदेश के इंदौर में हुई बैठक में इस योजना पर चर्चा की गई थी।

हालांकि ‌अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, इतिहास लेखन की अपनी योजना पर पहले से ही काम कर रहा है लेकिन इसमें जिलों के इतिहास को जोड़ने की बात इस मीटींग में ही तय की गई।

विज्ञापन

18 से ज्यादा है पुराणों की संख्या

RSS is re-writing the indian history.

संघ ऐसे लोगों की भी खोज कर रहा है जो अपने जिले का इतिहास लिख सकें। उन्हें संघ द्वारा हर संभव मदद उपलब्‍ध कराई जाएगी। पुराण पर आधारित इतिहास लेखन करने वाली संस्‍था 'अ‌खिल भारतीय इतिहास संकलन योजना' का मानना है कि पुराण की संख्या को केवल 18 तक सीमित करना गलत है।

असल में इनकी संख्या 106 है। संस्‍था का उद्देश्य इन सभी पुराणों को संकलित कर उनके आधार पर इतिहास लिखना है। ये सभी पुराण विभिन्न विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और देश-विदेश में कई व्यक्तिगत संकलनकर्ताओं के पास हैं जिन्हें प्राप्त करने की को‌शिश संस्‍था कर रहा है।

पुराण की इंसाइक्लोपीडिया का भी निर्माण

RSS is re-writing the indian history.
संस्‍था के मु‌ताबिक पुराण लिखित भारतीय इतिहास का सबसे प्राचीन स्रोत है। जिसमें ब्रह्मांड के निर्माण से लेकर सभी जरूरी बातों का वर्णन किया गया है। ज्यादातर पुराण संस्कृत में हैं, लेकिन कई का अन्य भाषाओं में भी इनका अनुवाद हो चुका है।

संस्‍था का मकसद केवल ‌इतिहास लेखन ही नहीं है। इस प्रयास में पुराणों के 8.5 लाख श्लोकों को भी संग्रहित किया जाएगा जिसके आधार पर 100 खंडों वाली पुराण आधारित इंसाइक्लोपीडिया का निर्माण होगा।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना का गठन 1994 में आरएसएस द्वारा किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed