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जानें, क्यों ठंडा पड़ गया रियल स्टेट का कारोबार
अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Wed, 29 Jan 2014 01:36 PM IST
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एनसीआर में सीएलयू के नए लाइसेंस पर लगी रोक के बाद रियल एस्टेट कारोबार ठंडा हो गया है। विशेषकर साइबर सिटी में तो नए प्रोजेक्ट के लिए बुकिंग ही बंद कर दी गई है।
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सोहना रोड पर टेंट लगाकर बुकिंग करने वाले जहां गायब हो गए हैं, वहीं एसएमएस से नए प्रोजेक्ट की सूचना मिलनी भी बंद हो चुकी है।
प्रदेश सरकार ने पिछले साल गुड़गांव-मानेसर विकास योजना 2031 के प्रारूप को अंतिम मंजूरी दी थी। इसके तहत गुड़गांव शहर का विस्तार सोहना, मानेसर, धारूहेड़ा से होता हुआ जयपुर के भिवाड़ी तक पहुंचता। मास्टर प्लान 2031 आने के बाद सोहना रोड पर गुड़गांव एक्सटेंशन बसाने की कवायद भी तेज हो गई थी।
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इसके लिए बाकायदा टेंट लगाकर निवेशकों को विभिन्न प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी जा रही थी। करीब एक सप्ताह पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अर्जी पर सुनवाई करते हुए एनसीआर में सीएलयू के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी।
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हाईकोर्ट का निर्देश था कि सब रीजनल प्लान की अधिसूचना जारी किए बिना एनसीआर में मास्टर प्लान को फाइनल नहीं किया जा सकता। ऐसे में रीजनल प्लान की अधिसूचना जारी होने तक सीएलयू के नए लाइसेंस जारी करने पर रोक रहेगी।
इस रोक के बाद अचानक से गुड़गांव एक्सटेंशन पर विराना छा गया है। वर्तमान में यहां इक्का-दुक्का ही ऐसे बिल्डर हैं, जो कि टेंट लगाकर लोगों को अपने प्रोजेक्ट्स की जानकारी दे रहे हैं। शेष सभी बिल्डरों ने बुकिंग बंद कर दी है।
इन पर पडेगा असर
गुड़गांव 2031 मास्टर प्लान में 20 सेक्टरों को बसाने की अधिसूचना जारी की गई थी। इन सेक्टरों में दो टाउनशिप और 12 से अधिक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने की योजना है। सोहना मास्टर प्लान 2031 की बात करें तो यहां 1711 हैक्टेयर भूमि रिहायशी उद्देश्य के लिए रखी गई है। कमर्शियल कार्यों के लिए 255 हैक्टेयर भूमि का प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए 1236 हैक्टेयर भूमि का प्रावधान रखा गया है, जो कि कुल शहरी क्षेत्र का लगभग 20 प्रतिशत भाग होगा। पब्लिक यूटिलिटी के लिए 241 हैक्टेयर, ट्रांसपोर्ट व क यूनिकेशन सुविधाओं के लिए 627 हैक्टेयर तथा पब्लिक एवं सेमी-पब्लिक कार्यों के लिए 573 हैक्टेयर भूमि निर्धारित की गई है। अगर सीएलयू पर लगी रोक नहीं हटती तो यहां बनने वाले आधुनिक शॉपिंग कांप्लेक्स, ऑफिस कांप्लेक्स, मॉल्स, इंटरनेटमेंट पार्क, बैंक और यूनिवर्सिटीज खासे प्रभावित होंगे।
किफायती आशियाने का सपना दूर
प्रॉपटी विशेषज्ञ कार्तिक तिवारी बताते हैं कि सीएलयू के नए लाइसेंस पर लगी रोक जल्द न हटने पर प्रोजेक्ट्स का लागत मूल्य बढ़ जाएगा। यही कारण है कि अधिकांश डेवेलपर्स ने बुकिंग बंद कर दी है। इसका सबसे बड़ा नुकसान निवेशकों को होगा, क्योंकि उन्हें आशियाने के लिए अधिक खर्च करना होगा।