देश के सातवें प्रधानमंत्री भारत रत्न राजीव गांधी को आज यानी 20 अगस्त को उनके जन्मदिन के मौके पर पूरा देश याद कर रहा है। अपने राजनीतिक कार्यकाल में देश को तकनीकि और वैश्विक बुलंदियों तक पहुंचाने वाले राजीव गांधी के जीवन के कई दिलचस्प तथ्य हैं जिनसे आप अनजान होंगे। आपको बता रहे हैं उनके बारे में ऐसी ही अनसुनी बातें जो बहुत कम लोग जानते हैं-
जन्मदिन विशेषः ऐसे भी थे राजीव गांधी, उनके बारे में 5 दिलचस्प बातें नहीं जानते होंगे आप
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प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा करने वाले राजीव गांधी, नेहरू-गांधी परिवार के आखिरी सदस्य थे जो राजनीति में इतने शीर्ष तक पहुंचे। राजनीति में आने से पहले वे पेशे से पायलट थे। राजीव को अपने नाना और मां की तरह राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने पायलट बनने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की भी बहुत कोशिश की थी, लेकिन किताबी ज्ञान में सीमित हो जाना उन्हें रास नहीं आया। लंदन में पढ़ाई करने के बाद वे कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए। वहां तीन साल पढ़ने के बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिली, फिर उन्होंने लंदन के ही इंपीरियल कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया, लेकिन उसमें भी उनका मन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के फ्लाइंग कल्ब में पायलट की ट्रेनिंग शुरू की और 1970 में एयर इंडिया के साथ अपने करियर की शुरूआत की।
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि राजीव गांधी पायलट के साथ ही फोटोग्राफी के भी बेहद शौकीन थे। उनके इस शौक के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी। उनकी तस्वीरों को छापने के लिए कई पब्लिशरों ने भी मशक्कत की थी, लेकिन उन्होंने कभी अनुमति नहीं थी। उनके निधन के बाद जब सोनिया गांधी ने राजीव गांधी द्वारा खींची गई तस्वीरों के संग्रह को किताब का रूप दिया तब जा कर दुनिया के सामने इस बात का खुलासा हुआ। उस किताब का नाम है 'राजीव्स वर्ल्ड- फोटोग्राफ्स बाय राजीव गांधी'।
1980 के दशक में जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था तो उनकी छवि मिस्टर क्लीन की थी। शुरुआत से ही विदेश में रह कर पढ़ाई करने और 40 वर्ष से भी कम उम्र में राष्ट्रीय राजनीति में इतनी ऊंचाई तक पहुंचने के कारण राजीव लोकप्रीय भी थे और बेदाग भी। हालांकि भविष्य में कई बड़े-बड़े घोटालों में नाम आने के बाद उनकी यह छवि धूमिल हो गई।
राजीव गांधी संभवत: देश के इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो कई बार खुद ही अपनी गाड़ी चला कर जगह-जगह जाते थे। कई बार तो राजीव गांधी चुनावी रैलियों में भी खुद ही अपनी कार चला कर पहुंच जाते थे। सुरक्षा गार्डों को तेजी से उनके पीछे चलते रहना पड़ता था।