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डेंगू का खौफ दिखाकर मरीजों का दोहन कर रहे निजी अस्पताल
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद /अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Sat, 19 Sep 2015 05:41 PM IST
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शहर के निजी अस्पताल डेंगू का खौफ दिखाकर मरीजों का दोहन करने में जुटे हैं। इन अस्पतालों में पहुंचने वाले अधिकतर बुखार पीड़ित को बाकायदा जांच के बाद डेंगू होना बता भर्ती कर लिया जाता है।
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सच्चाई यह है कि इन अस्पतालों में डेंगू का इलाज कराने वाले प्रति 110 लोगों में महज पांच को ही यह बीमारी हुई थी। हालांकि, इन लोगों को भर्ती कर डेंगू का इलाज कर दिया गया।
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दरअसल यह अस्पताल बुखार से पीड़ित मरीजों के खून की जांच कराते हैं। एनएस-1 एंटीजन नाम की यह जांच डेंगू सहित करीब 40 तरह के वायरल बुखार होने में की जाती है। मेडिकल क्षेत्र में इसे स्क्रीनिंग टेस्ट कहा जाता है।
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यानि इससे वायरल या डेंगू बुखार होने की प्राथमिक जानकारी ही मिलती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को सीधे डेंगू बता दिया जाता है। घबराए परिजन मरीज को अस्पताल में भर्ती करा इलाज शुरू करवा देते हैं।
हालांकि, डेंगू की पुष्टि के लिए इन अस्पतालों से मरीज के खून का सैंपल लेकर इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोजेक्ट (आईडीएसपी) लैब भेजा जाता है। यहां डेंगू की पुष्टि के लिए आईजीएम (इम्यूनोग्लोब्युलिंस) एंटीजन टेस्ट किया जाता है।
अभी तक शहर के निजी अस्पतालों से डेंगू के 492 संदिग्ध मरीजों (जिन्हें एनएस-1 पॉजिटिव पाया गया) के खून के सैंपल आईडीएसपी लैब भेजे गए। इनमें से मात्र 23 में ही डेंगू की पुष्टि हुई।
आईडीएसपी इंचार्ज और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रामभगत के मुताबिक निजी अस्पतालों से रोजाना आठ से दस सैंपल डेंगू सस्पेक्टेड मरीजों के भेजे जाते हैं।
अभी तक आए 492 में से महज 23 में ही डेंगू वायरस पाया गया। उन्होंने बताया कि एनएस-1 एंटीजन टेस्ट स्क्रीनिंग टेस्ट है। आईजीएम टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होती है।
नहीं देते हैं टेस्ट रिपोर्ट
निजी अस्पतालों के डेंगू बताकर मरीजों को भर्ती तो कर लिया जाता है लेकिन आईडीएसपी लैब की रिपोर्ट नहीं दी जाती। उन्हें सिर्फ एनएस-1 एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट पकड़ा दी जाती है। जानकारी के अभाव में तीमारदार मोटी रकम खर्च कर बीमार का इलाज कराने को मजबूर होते हैं।
गैर जरूरी प्लेटलेट्स चढ़वाना भी खतरा
सिविल अस्पताल डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि डेंगू के अलावा मलेरिया, वायरल या अन्य प्रकार के बुखार में भी प्लेटलेट्स काउंट गिरता है।
उन्होंने बताया कि सामान्य आदमी में प्लेटलेट्स काउंट डेढ़ से चार लाख होता है। 10 हजार से कम होने पर प्लेटलेट्स चढ़ाई जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि गैर जरूरी रूप से प्लेटलेट्स चढ़ाने से भविष्य में मरीज को संक्रमण हो सकता है। मालूम हो कि निजी अस्पताल वाले प्लेटलेट्स काउंट गिरने का भय दिखाते हैं।
होता है बहुत महंगा इलाज
डेंगू के इलाज के नाम पर इन अस्पतालों में मरीज और उनके तीमारदारों से मोटा धन वसूला जाता है। अलग अलग अस्पतालों में पांच दिन के इलाज के 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक रुपये का खर्च आता है।
क्या हैं डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस
-बहुत तीव्र पेट दर्द और टेंडरनेस होने
-लगातार उल्टियां आने और बेचैनी बढ़ने
-तेज बुखार के बाद अचानक शरीर ठंडा पड़ने (हाईपोथर्मिया)
-रक्तस्राव होने और शरीर पीला पड़ने
-नाक मुंह से ठंडा चिपचिपा स्राव होने
-भौतिक परीक्षण में ही लीवर (जिगर, यकृत) बढ़ा हुआ दिखने
-मानसिक स्थित असामान्य होने
इनमें से कोई एक या अधिक लक्षण होने पर मरीज को भर्ती कराया जाना चाहिए।