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'स्लीवलेस पहनने वाली लड़की को किया जाता है बेइज्जत'

Tue, 14 Oct 2014 05:49 PM IST
Updated Tue, 14 Oct 2014 05:49 PM IST
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Pinky chauhan suicide case: new facts.

पिंकी की उम्र महज 22 साल थी। उसके घरवाले उसपर नाज करते थे। इसलिए नहीं कि वह बहुत बहादुर थी बल्कि, इसलिए क्योंकि वह उस घर की शान थी। जितती होशियार वह पढ़ने में थी उतनी ही खेल-कूद में भी आगे। उसे दसवीं में उसे 94% अंक मिले थे जबकि, 12वीं में उसने 84% अंक हासिल किए थे।

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पिंकी को अन्याय बिल्कुल पसंद नहीं था। इसलिए जब उसे पता चला कि कॉलेज प्रशासन ने कई लड़कियों को सिर्फ जीरो अंक देकर फेल कर दिया है तो वह खुद को रोक न सकी।
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कॉलेज प्रशासन का विरोध करने के दौरान कथित रूप से कुछ टीचरों ने उसे इतना उकसाया कि उसने खुद को सरेआम आग लगा ली। 14 दिन जूझने के बाद रविवार को उसने दम तोड़ दिया। पिंकी की मां राजरानी चौहान ने बताया कि रविवार को उसके अंतिम संस्कार के बाद वह पूरी रात पिंकी के बिस्तर के पास बैठी रहीं।
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इस मामले में पिंकी के परिवार वालों का कहना है कि पिंकी की मौत का कारण परीक्षा में मिले कम नंबर तक ही सीमित नहीं है। असल में मामला और भी गंभीर है जिसकी अनदेखी की जा रही है।

परिवार का कहना है कि यह पूरा मामला कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन की उस लापरवाही का है जिसे लंबे अरसे से बहुत ही सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है।

'स्लीवलेस पहनने पर किया जाता है बेइज्जत'

Pinky chauhan suicide case: new facts.

पिंकी की एक सहेली का कहना है कि गुड़गांव के सेक्टर 14 स्थित गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज और महर्षी दयानंद यूनिवर्सिटी बच्चों के भविष्य से यह खिलवाड़ पिछले दो साल से लगातार कर रहा है। इस घपले की जड़ परीक्षा में मिले नंबरों का ऑनलाइन सबमिशन है।

असल में बीएससी में छात्रों को 70 नंबर उनके इंटरनल एसेसेमेंट के आधार पर मिलता है, जबकि 30 नंबर थीयरी में दिया जाता है। इन दोनों नंबरों को दयानंद यूनिव‌र्सिटी को भेजा जाता है। यूनिवर्सिटी में नंबरों को मार्कशीट पर चढ़ाया जाता है। यहीं पर सारा घालमेल किया जाता है।

एक छात्रा ने तो यह भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी से मार्कशीट पाने के लिए भी स्टूडेंट्स को एक हजार रूपए देने पड़ते हैं। यह उन स्टूडेंट्स के लिए बेहद पीड़ादायक है जो इतने पैसे अफोर्ड नहीं कर सकते।

मामला केवल परीक्षा और उसमें मिले नंबरों तक ही सीमित नहीं है। एक छात्रा का आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल स्लीव लेस कपड़े पहन कर आने वाली लड़कियों को बेइज्जत भी करती हैं।

गौरतलब है कि पिंकी की मौत से नाराज उसके गांव कासन की पंचायत ने फैसला किया है कि अगर 24 घंटे के अंदर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया तो पूरा गांव 15 अक्टूबर को होने वाले चुनाव का बहिष्कार करेगा।

साभार: इंडियन एक्सप्रेस

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