{"_id":"5d67a00e8ebc3e93a230afb2","slug":"pc-chako-writes-to-sonia-gandhi-want-to-go-back-kerala-leave-delhi-incharge-post","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पीसी चाको ने सोनिया गांधी को लिखा खत, दिल्ली का प्रभार छोड़ वापस जाना चाहते हैं केरल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीसी चाको ने सोनिया गांधी को लिखा खत, दिल्ली का प्रभार छोड़ वापस जाना चाहते हैं केरल
Thu, 29 Aug 2019 03:38 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 29 Aug 2019 03:38 PM IST
विज्ञापन
पीसी चाको
- फोटो : ani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली कांग्रेस प्रदेश के प्रभारी पीसी चाको ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पत्र लिखा है कि वह केरल वापस जाना चाहते हैं। बता दें कि पीसी चाको बीते साढ़े चार साल से दिल्ली में कांग्रेस के प्रभारी की कमान संभाल रहे हैं।
विज्ञापन
ऐसे में माना जा सकता है दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए यह बहुत बड़ा झटका है। ऐसे में अब अगर उनकी बात कांग्रेस हाई कमान स्वीकार कर लेता है तो सोनिया गांधी के सामने दिल्ली में संगठन को एक बार फिर खड़ा करने की चुनौती होगी।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव के बाद हुई थी पीसी चाको के इस्तीफे की मांग
गौरतलब है कि जब लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के हार की समीक्षा के लिए तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित की बुलाई बैठक में प्रभारी पीसी चाको के साथ तीनों कार्यकारी अध्यक्ष व दूसरे पदाधिकारी भी थे।
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव में हार पर चर्चा के दौरान पूर्व पार्षद रोहित मनचंदा ने कहा कि पीसी चाको को नवंबर 2014 में दिल्ली प्रदेश प्रभारी बनाया गया था। उनकी अगुवाई में पार्टी न सिर्फ हालिया लोकसभा चुनाव, बल्कि 2015 का दिल्ली विधानसभा का चुनाव भी हारी है। 2017 का एमसीडी चुनाव भी कांग्रेस के लिए खराब रहा।
अगर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं तो पीसी चाको को भी इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए। दूसरे कई सदस्यों ने भी उनकी बात का समर्थन किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी और दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष शीला दीक्षित ने भी इस्तीफे की पेशकश की है तो पीसी चाको को भी इस्तीफा देना चाहिए।
मनचंदा के मुताबिक, उस वक्त हुई बैठक में पीसी चाको ने उनसे कहा कि उनके जैसे नेताओं को दिल्ली कांग्रेस में होने का कोई अधिकार नहीं है। मनचंदा ने राहुल गांधी व सोनिया गांधी से मांग की कि प्रदेश प्रभारी बदला जाए। मनचंदा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पीसी चाको के इस्तीफे की मांग की थी।
दूसरी तरफ, पीसी चाको ने इस तरह की किसी तरह भी घटना को सिरे से खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि वह संबंधित व्यक्ति को ज्यादा नहीं जानते। हालांकि बैठक में मौजूद एक नेता ने बताया कि कार्यालय में मनचंदा के साथ पीसी चाको की तीखी नोकझोंक हुई थी। ज्यादातर पदाधिकारी दिल्ली में कांग्रेस की लगातार हार से चिंतित दिखे।
गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव के दौरान पीसी चाको ने आप के साथ गठबंधन की वकालत की थी। वरिष्ठ नेता अजय माकन भी इसके पक्षधर थे। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित समेत पार्टी नेताओं के एक धड़े ने इसका विरोध किया था। इस पर पार्टी के अंदर काफी खींचतान हुई थी।
आखिर में दोनों दलों के बीच समझौता नहीं हो सका था। इससे लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में काफी देर हो गई थी। प्रदेश कांग्रेस के नेता सातों सीटों पर उम्मीदवारों की हार की एक वजह इसे भी ठहराते रहे हैं।
दूसरी तरफ, पीसी चाको ने इस तरह की किसी तरह भी घटना को सिरे से खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि वह संबंधित व्यक्ति को ज्यादा नहीं जानते। हालांकि बैठक में मौजूद एक नेता ने बताया कि कार्यालय में मनचंदा के साथ पीसी चाको की तीखी नोकझोंक हुई थी। ज्यादातर पदाधिकारी दिल्ली में कांग्रेस की लगातार हार से चिंतित दिखे।
गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव के दौरान पीसी चाको ने आप के साथ गठबंधन की वकालत की थी। वरिष्ठ नेता अजय माकन भी इसके पक्षधर थे। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित समेत पार्टी नेताओं के एक धड़े ने इसका विरोध किया था। इस पर पार्टी के अंदर काफी खींचतान हुई थी।
आखिर में दोनों दलों के बीच समझौता नहीं हो सका था। इससे लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में काफी देर हो गई थी। प्रदेश कांग्रेस के नेता सातों सीटों पर उम्मीदवारों की हार की एक वजह इसे भी ठहराते रहे हैं।