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नौकरी के बहाने बेरोजगारों को ठगने वालों पर शिकंजा

Sun, 25 Oct 2015 08:44 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Oct 2015 08:44 AM IST
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On pretext of providing jobs to the unemployed started cheated.

दक्षिण जिले की आरके पुरम थाना पुलिस ने पूरे भारत में ठगी करने एक गिरोह का पर्दाफाश कर सरगना समेत तीन आरोपियों को दबोचा है।

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आरोपी करीब 150 युवकों से ज्यादा बेरोजगार युवकों से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। आरोपी भारत सरकार के वन विभाग में फील्ड ऑफिसर व वन रक्षक की नौकरी लगवाने का झांसा देते थे।

आरोपी हर पीड़ित से 70 हजार से एक लाख रुपये लेते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित लोगों की संख्या कई सौ हो सकती है। सरकारी नौकरी लगवाने के अलावा आरोपी कई अन्य तरीकों से भी ठगी करते थे।
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कुछ मंत्रालयों के अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आ सकती है। दक्षिण जिला डीसीपी प्रेमनाथ के अनुसार पुणे, महाराष्ट्र निवासी मोरेस्वर केवलराम कुमोभोरे ने आरकेपुरम थाने में तैनात इंस्पेक्टर अरविंद शर्मा की शिकायत दी थी कि उसने फरवरी, 2014 में एक अखबार में वन विभाग में वन रक्षक की नौकरी के लिए विज्ञापन देखा।
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बड़े अधिकारियों का हो सकता है खुलासा

On pretext of providing jobs to the unemployed started cheated.

उसने विज्ञापन में दिए गए फोन नंबर पर बात की तो प्रवीण कुमार नाम के व्यक्ति ने बात की थी। प्रवीण कुमार ने वन विभाग का ऑफिसर बताते हुए दिल्ली में वन विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने की बात कही।

आरोपी ने फोन पर ही उसका साक्षात्कार ले लिया था। कुछ दिनों बाद रश्मि नाम की महिला ने फोन कर बताया कि उसे वन विभाग में नौकरी के लिए चुन लिया गया है। उसके बाद उसे दिल्ली बुलाया गया।

मोरेस्वर अपने रिश्तदार के साथ 5 सितंबर, 2014 को दिल्ली आ गया। यहां पर मोती बाग में स्थित कर्नाटक रेस्तरां में प्रवीण कुमार उसे मिला और मेडिकल परीक्षण व अन्य खर्चे की बात कहकर 20 हजार रुपये देने की बात की। मोरेस्वर ने उसे 20 हजार रुपये दे दिए।

इसके बाद उसे गाजियाबाद स्थित क्रिस्टियल होटल में मीटिंग के लिए बुलाया। वहां 26 और बेरोजगार युवा थे। यहां पर प्रवीण कुमार ने अपने दो साथी अमित शर्मा व सरजीत कुमार उर्फ प्रताप से मिलवाया।

ब्लड सैंपल के बाद दिए खाते के नंबर

On pretext of providing jobs to the unemployed started cheated.

होटल में मोरेस्वर का ब्लड सैंपल लिया गया। इसके बाद मोरेस्वर से 70 हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा गया। साथ में उसे दो बैंक खातों के नंबर दिए गए।

70 हजार रुपये जमा कराने के बाद उसे नियुक्त पत्र मिल गया। मगर उससे बाद में 50 हजार रुपये और मांगे जाने लगे। संदेह होने पर उसने इसकी शिकायत पुलिस में की थी।

आरके पुरम थानाध्यक्ष नीरज चौधरी की देखरेख में इंस्पेक्टर अरविंद शर्मा, एसआई एसकेसिंह व विजय कौशिक टीम ने सरगना विनोद कुमार उर्फ प्रवीण कुमार को उस समय पकड़ लिया जब वह 50 हजार रुपये लेने आया था।

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