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डीयू कुलपति के कार्यक्रम में हंगामा: सत्य निकेतन हादसे के बाद एनएसयूआई ने की कड़ी निंदा, पूछा- जिम्मेदार कौन?

Tue, 08 Sep 2026 04:59 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 08 Sep 2026 04:59 PM IST
सार

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद डीयू कुलपति के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर एनएसयूआई ने कड़ी आपत्ति जताई। प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता पर सवाल उठाए और प्रभावित छात्रों व उनके परिवारों के प्रति जवाबदेही की मांग की।

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NSUI creates ruckus at DU Vice-Chancellor event following Satya Niketan incident
डीयू वीसी के कार्यक्रम में हंगामा - फोटो : डीयू वीसी के कार्यक्रम में हंगामा

विस्तार

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा एक विश्वविद्यालय कार्यक्रम में शामिल होने की कड़ी निंदा की है। यह निंदा सत्या निकेतन में हुई दुखद त्रासदी के कुछ ही दिनों बाद की गई है। इस घटना में कई छात्रों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में अन्य छात्र भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे।

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एनएसयूआई के सदस्यों ने आर्ट्स फैकल्टी के पास आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की असंवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सत्या निकेतन त्रासदी से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के प्रति तत्काल जवाबदेही की मांग की। छात्रों का कहना था कि पूरा विश्वविद्यालय समुदाय इस समय शोक में है। ऐसे में कुलपति का किसी कार्यक्रम में शामिल होना उचित नहीं था।
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प्रदर्शनकारियों ने कुलपति के आचरण को असंवेदनशील बताया। उनका तर्क था कि त्रासदी के तुरंत बाद ऐसे किसी कार्यक्रम में भाग लेना उचित नहीं था। यह पीड़ितों के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले प्रभावित परिवारों को सांत्वना देनी चाहिए थी। इसके बजाय, कुलपति का कार्यक्रम में शामिल होना छात्रों के गुस्से का कारण बना। यह घटना विश्वविद्यालय के छात्रों और प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाती है।


एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से त्रासदी के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच कराने पर जोर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और सहायता की भी मांग की। छात्रों का मानना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाने का एक प्रयास था।

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