गलियों में छिपे पीजी, वहां भी खतरा: सत्य निकेतन जैसे पूर्वी दिल्ली के भी हालात; सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के बाद पूर्वी दिल्ली में पीजी-हॉस्टलों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। सोमवार को लक्ष्मी नगर और शकरपुर की पड़ताल में सामने आया कि रिहायशी मकानों के बीच कई मंजिल तक पीजी चल रहे हैं। इनकी पहचान करना मुश्किल है और संकरी सीढ़ियां व गलियां आपातकालीन स्थिति में जोखिम बढ़ाती हैं।
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सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने के बाद पूर्वी दिल्ली में पीजी-हॉस्टलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को लक्ष्मी नगर और शकरपुर की गलियों में की गई पड़ताल में सामने आया कि रिहायशी मकानों के बीच कई मंजिल तक पीजी चल रहे हैं। बाहर से इनकी पहचान करना भी आसान नहीं है। कहीं पीजी का बोर्ड नहीं है तो कहीं गली या मकान नंबर के सहारे छात्रों को कमरे तक पहुंचाया जाता है।
लक्ष्मी नगर मेट्रो के आसपास से शकरपुर की ओर बढ़ते ही वीर सावरकर ब्लॉक, उपाध्याय ब्लॉक, अरुणा पार्क और आसपास की गलियों में ऐसे कई मकान नजर आते हैं। सामान्य दिखने वाले इन भवनों में कितने लोग रह रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है, इसका अंदाजा बाहर से लगाना मुश्किल है। कई जगह तीन से पांच मंजिल तक के मकान मिले। ऊपर जाने के लिए संकरी सीढ़ियां हैं।
आग या किसी अन्य आपात स्थिति में यही मुख्य निकासी मार्ग बन सकता है। एक ही सीढ़ी से कई मंजिलों के लोगों के निकलने पर भगदड़ और धुएं का खतरा बढ़ सकता है। संकरी गलियों में सड़क किनारे खड़े वाहन भी आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में बाधा बन सकते हैं।
पांच मंजिल वाले भवनों पर लगेगी सील, शुरू होगा सुरक्षा ऑडिट : सीएम
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने शहर में पांच मंजिल वाले भवनों पर कार्रवाई का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को मौके पर पहुंचकर दूसरे दिन के बचाव अभियान की समीक्षा की और पांच मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए। पुराने भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट भी कराया जाएगा।
वहीं, पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भवन की सुरक्षा प्रमाणित करना अनिवार्य करने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में पांचवीं मंजिल वाले भवनों को तत्काल सील किया जाएगा। लापरवाही के लिए जिम्मेदार एमसीडी अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
सरकार का यह कदम सत्य निकेतन हादसे के बाद दूसरे पुराने और असुरक्षित भवनों में संभावित खतरे को रोकने के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार ऐसे सभी पुराने भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की तैयारी कर रही है। नई नीति के तहत पुराने भवनों के मालिकों को उनकी संरचनात्मक सुरक्षा की रिपोर्ट देनी होगी। खासकर पीजी, नर्सिंग होम, स्कूल और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को संचालित करने से पहले भवन की सुरक्षा का प्रमाण देना जरूरी होगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक सत्य निकेतन की पुरानी इमारत के बेसमेंट में पानी जमा था। इसी के साथ भवन में मरम्मत का काम भी चल रहा था। पानी और पुराने ढांचे पर चल रहे मरम्मत कार्य के कारण इमारत ढह गई।