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लखीमपुर हिंसा : योगी सरकार को हर हाल में विवाद खत्म करने का था निर्देश, इस चिंता की वजह से मानीं सभी मांगें

Tue, 05 Oct 2021 02:24 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 05 Oct 2021 02:24 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद से ही पीएमओ और खुद गृहमंत्री अमित शाह सक्रिय हुए। सूत्रों ने बताया कि केंद्र की ओर से राज्य सरकार हर हाल में मामले को ठंडा करने के निर्देश दिए गए। यही कारण है कि रविवार रात तक हमलावर राज्य सरकार और प्रदेश भाजपा के सुर सोमवार को बदल गए।

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Yogi government was instructed to end dispute in Lakhimpur Violence case party not want entangled in caste maze before election
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

विधानसभा चुनाव से पूर्व यूपी में जातीय तनाव के बाद अब किसान आंदोलन के हिंसक रूप ले लेने से भाजपा नेतृत्व और केंद्र परेशान है। पार्टी और केंद्र सरकार नहीं चाहती कि चुनाव से पहले भाजपा जातीय चक्रव्यूह में उलझे। यही कारण है कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सोमवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्री अमित शाह ने एक-एक गतिविधि पर निगाह रखी। राज्य सरकार को हर हाल में विवाद को खत्म करने का निर्देश दिया है।

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दरअसल किसाम आंदोलन में पश्चिम उत्तर प्रदेश की जाट बिरादरी बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही है। इसकी काट के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी के अलावा कई और फैसले लिए हैं। इसी बाच राजा मिहिर भोज की जाति के सवाल पर गुर्जर समुदाय की नाराजगी ने पार्टी की परेशानी बढ़ाई। पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में बीच का रास्ता निकाल पाती, इससे पहले लखीमपुर खीरी में हिंसक वारदात हो गई। भाजपा को डर है कि इस मामले में बीच का रास्ता नहीं निकलने पर आंदोलन की आग पूरे राज्य में फैल सकती है। 
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राजा मिहिर भोज विवाद में भी हल निकालने का था निर्देश
सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार को समय रहते राजा मिहिर भोज की जाति मामले में छिड़े विवाद में भी बीच का रास्ता निकालने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि बीते दिनों ग्रेटर नोएडा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजा भोज की मूर्ति का अनावरण किया।। इस दौरान उनके नाम के आगे गुर्जर शब्द को हटा दिया गया था। राजा भोज पर गुर्जर और राजपूत बिरादरी दोनों दावा जता रही है। गुर्जर बिरादरी इस मामले में आंदोलनरत है। राज्य सरकार से कहा गया है कि वह गुर्जर बिरादरी के प्रतिनिधियों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकाले।  
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पीएमओ और शाह रहे सक्रिय
लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद से ही पीएमओ और खुद गृहमंत्री अमित शाह सक्रिय हुए। सूत्रों ने बताया कि केंद्र की ओर से राज्य सरकार हर हाल में मामले को ठंडा करने के निर्देश दिए गए। यही कारण है कि रविवार रात तक हमलावर राज्य सरकार और प्रदेश भाजपा के सुर सोमवार को बदल गए। सोमवार को केंद्रीय गृहराज्यमंत्री के पुत्र सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने पर राज्य सरकार ने अपनी सहमति दी। विवाद आगे नहीं बढ़े इसके लिए 45-45 लाख रुपये के मुआवजे की भी घोषणा की गई। 


क्यों है चिंता?
दरअसल किसान आंदोलन में पश्चिम उत्तर प्रदेश की जाट बिरादरी की अहम भूमिका है। भाजपा इस मामले में जाट बिरादरी की मनाने में जुटी है। राजा मिहिर भोज जाति विवाद से पहले भाजपा को लगता था कि इस क्षेत्र में गुर्जर समेत अन्य जातियों के समर्थन से वह विधानसभा चुनाव में पिछला प्रदर्शन दोहरा लेगी। मगर गुर्जर बिरादरी में फैली नाराजगी ने भाजपा की चिंता को बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर बिरादरी ज्यादातर सीटों पर निर्णायक भूमिका में है। यही कारण है कि भाजपा विधानसभा चुनाव में जातीय चक्रव्यूह में नहीं उलझना चाहती। 

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