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नोएडा फिल्म सिटी में मनाया गया वर्ल्ड रेडियो डे

Sun, 14 Feb 2021 04:53 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 14 Feb 2021 04:53 PM IST
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world radio day celebrated at noida film city
विश्व रेडियो दिवस - फोटो : अमर उजाला
रेडियो एक ऐसा माध्यम है जो अपनी बात को एक समय में करोड़ों लोगों तक पहुंचा देता है। कोरोना काल में रेडियो ने न सिर्फ गानों से मनोरंजन किया, बल्कि सामाजिक कार्य करने में भी वो पीछे नहीं हटे, चाहे वो मास्क लगाना हो, सेनिटाइज करना हो या गांव जाते हुए मजदूरों को समझाना हो या फिर लोगों को खाना बांटना हो, या सर्दी में गरीबों के लिए कपड़े जमा करके देना हो, रेडियो ने अपनी भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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मैं तारीफ करना चाहूंगा रेडियो जॉकी की जो अपनी बात को इस तरह प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं कि हर कोई सुनना चाहता है, आज मैं यह सब बातें इसीलिए कह रहा हूं क्योंकि आज वर्ल्ड रेडियो डे है और 9वें इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ जर्नलिस्म के दूसरे दिन हम रेडियो डे मना रहे हैं। यह कहना था एएएफटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. संदीप मारवाह का, जिन्होंने आज रायपुर रेडियो की शुरुआत की।
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इस वेबिनार में सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. सुनील पाराशर, जर्नलिस्ट सुनील डैंग, फिल्म क्त्रिस्टिक मीना अय्यर, एडिटर ओमकारेश्वर पांडे, जर्नलिस्ट राजेश बादल, जर्नलिस्ट अरविन्द के. सिंह और रेडियो ब्रॉडकास्टर अनूप बॉस ने फेक न्यूज़ पर परिचर्चा की।
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इस परिचर्चा में डॉ. सुनील पाराशर ने कहा कि आज हर इंसान पत्रकार होता जा रहा है क्योंकि उसके हाथ में मोबाइल नाम का प्राणी है जो हर चीज को कैप्चर कर लेता है, मोबाइल को प्राणी इसलिए कह रहा हूं क्योंकि उसमें चलने की क्षमता नहीं है, बल्कि लोगों को चलाने की क्षमता बहुत है।

‘फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में उभरी हैं, जिनका प्रसार करने वाले खुद को पत्रकार के तौर पर पेश करते हैं और इस महान पेशे को कलंकित करते हैं’ या यूं कहें कि कई पत्रकार तो सवाल भी स्वयं करते हैं और जवाबों के शब्द भी मुंह में ठूस देते है और यहां तक कि खुद ही न्याय भी कर देते हैं। जिसका असर यह होता है की जवाब देने वाला ही कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर लेता है जो देशहित में नहीं है लेकिन पत्रकार के लिए यह ब्रेकिंग न्यूज बन जाती है।

राजेश बादल ने कहा कि फर्जी खबरें नए खतरे के रूप में सामने आई हैं जो हमारे लोकतंत्र के साथ साथ विश्व स्तर पर भी हमे निम्न स्तर पर दिखाती है, जबकि आज पूरा विश्व हमे विश्व गुरु के रूप में देख रहा है। सुनील डैंग ने कहा की फेक न्यूज़ एक ऐसी बिमारी है या यूं कहें कि फैलता हुआ कैंसर है जिसमें उस पत्रकार की, पत्रकारिता की और उस प्रकाशन की मृत्यु होना अनिवार्य है।  


अरविन्द के. सिंह ने कहा कि असत्य न्यूज से लड़ने का हथियार सत्य न्यूज है, मोबाइल क्रांति फेक न्यूज को बढ़ावा ही देगी। दिन के अन्य वेबिनार में फिल्म डायरेक्टर राहुल रवैल, लेखक व कवि लक्ष्मी शंकर वाजपेयी,  पूरन सिंह सरीन, अभिजीत ठाकर, आर. के. सिंह, दयानन्द वत्स, अतुल मोहन, मॉडल एंजेलिक मोनेट, विनोद अग्निहोत्री, सहर ज़मान, नाइजीरिया के प्रिंस लाए बेबोर, फ्रांस के फिल्म मेकर बेंसौदा मोहम्मद अहेद ने भाग लिया।
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