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Noida News: हरेला पर्व संग की जाएगी धनधान्य और कुशलता की कामना
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जिले में रहने वाले उत्तराखंड वासी पारंपरिक तरीके से मनाते हैं पर्व
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उत्तराखंड के लोक पर्वों में हरेला से श्रावण मास और वर्षा ऋतु का शुभारंभ माना जाता है। हरेले के तिनकों को इष्ट देव को अर्पित कर अच्छे धन-धान्य, दुधारू जानवरों की रक्षा और परिवार की कुशलता की कामना की जाती है। 16 जुलाई आज इस पर्व को जिले में भी धूमधाम से मनाया जाएगा। जिले में भी इसको लेकर खासा उत्साह है, विशेष रूप से अलग-अलग सेक्टरों और सोसाइटियों में रहने वाले उत्तराखंड वासी हर साल पारंपरिक रूप से मनाते हैं।
ग्रेटर नोएडा निवासी सतेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि उत्तराखंड के लोग जहां भी रहते हैं। उनके द्वारा पौधे लगाकर हरा भरा करने का प्रयास किया जाता है। साथ ही धार्मिक रीति रिवाज के तहत पूजन करते हैं। हरेला पर्व को जरूर मनाते है। आज पर्व को विधी विधान से पूजा कर उत्तराखंड वासी अन्य लोगों के साथ धूमधाम से मनाएंगे। श्रद्धालु हरेले से नौ दिन पहले पांच, सात या नौ अनाजों को मिलाकर दो बर्तनों में बो देेते हैं। इसे मंदिर के स्थान पर रख कर जरूरत के अनुरूप पानी देते हैं। दो से तीन दिन में यह अंकुरित होने लगता है। सूर्य की सीधी रोशन से दूर होने के कारण हरेला यानी अनाज की पत्तियों का रंग पीला होता है।
परिवार का बुजुर्ग सदस्य हरेला काटता है। उसको देवी भगवती, गंगानाथ, ऐड़ी, हरज्यू, सैम, भूमिया आदि देवों को अर्पित किया जाता है। उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जेपी एस रावत ने बताया कि हरेला पर्व से ही श्रावण की शुरूवात होती है। हरेले की पहली शाम डेकर पूजन की परंपरा निभाई जाती है। ग्रेटर नोएडा में उत्तराखंड के लोग पारंपरिक तरीके से ही मनाते है। हरेला हरा भरा करने की पहल है। यहां पर पौधे लगाकर अधिक लोग मनाते है। संगठन के लोग अपने सेक्टर में पौधरोपण करते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। उत्तराखंड के लोक पर्वों में हरेला से श्रावण मास और वर्षा ऋतु का शुभारंभ माना जाता है। हरेले के तिनकों को इष्ट देव को अर्पित कर अच्छे धन-धान्य, दुधारू जानवरों की रक्षा और परिवार की कुशलता की कामना की जाती है। 16 जुलाई आज इस पर्व को जिले में भी धूमधाम से मनाया जाएगा। जिले में भी इसको लेकर खासा उत्साह है, विशेष रूप से अलग-अलग सेक्टरों और सोसाइटियों में रहने वाले उत्तराखंड वासी हर साल पारंपरिक रूप से मनाते हैं।
ग्रेटर नोएडा निवासी सतेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि उत्तराखंड के लोग जहां भी रहते हैं। उनके द्वारा पौधे लगाकर हरा भरा करने का प्रयास किया जाता है। साथ ही धार्मिक रीति रिवाज के तहत पूजन करते हैं। हरेला पर्व को जरूर मनाते है। आज पर्व को विधी विधान से पूजा कर उत्तराखंड वासी अन्य लोगों के साथ धूमधाम से मनाएंगे। श्रद्धालु हरेले से नौ दिन पहले पांच, सात या नौ अनाजों को मिलाकर दो बर्तनों में बो देेते हैं। इसे मंदिर के स्थान पर रख कर जरूरत के अनुरूप पानी देते हैं। दो से तीन दिन में यह अंकुरित होने लगता है। सूर्य की सीधी रोशन से दूर होने के कारण हरेला यानी अनाज की पत्तियों का रंग पीला होता है।
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परिवार का बुजुर्ग सदस्य हरेला काटता है। उसको देवी भगवती, गंगानाथ, ऐड़ी, हरज्यू, सैम, भूमिया आदि देवों को अर्पित किया जाता है। उत्तराखंड सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष जेपी एस रावत ने बताया कि हरेला पर्व से ही श्रावण की शुरूवात होती है। हरेले की पहली शाम डेकर पूजन की परंपरा निभाई जाती है। ग्रेटर नोएडा में उत्तराखंड के लोग पारंपरिक तरीके से ही मनाते है। हरेला हरा भरा करने की पहल है। यहां पर पौधे लगाकर अधिक लोग मनाते है। संगठन के लोग अपने सेक्टर में पौधरोपण करते हैं।
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