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क्यूआर कोड से पता चलेगा घर से कूड़ा उठा या नहीं
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क्यूआर कोड से पता चलेगा घर से कूड़ा उठा या नहीं
नोएडा। अब क्वीक रिस्पांस कोड (क्यूआर कोड) से पता चलेगा कि लोगों के घर से कूड़ा उठा या नहीं। नोएडा प्राधिकरण इसके माध्यम से निगरानी रखेगा। इससे प्राधिकरण के पास डोर टू डोर कूड़ा उठाने के बाबत ऑनलाइन डाटा भी उपलब्ध रहेगा। यह जानकारी सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में 67 गांवों के प्रतिनिधियों के साथ साफ-सफाई की कार्यशाला में संवाद के दौरान प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने की।
उन्होंने कहा कि नोएडा के सभी घरों के बाहर क्यूआर कोड की प्लेट लगेंगी। जब कूड़े की गाड़ी घर के बाहर पहुंचेगी तो कूड़ा उठाने के बाद क्यूआर कोड को स्कैन करना जरूरी होगा। इसकी स्कैनिंग से यह पता चल जाएगा कि कूड़े की गाड़ी उस घर तक गई। अभी हाईराइज सोसाइटियों के गेट पर इसे लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही सेक्टरों के घरों में भी प्लेट लगेंगी। सीईओ ने कहा कि अभी तक शहर के 50 प्रतिशत बाजारों में रात्रिकालीन सफाई का काम शुरू किया गया है। दिसंबर के अंत तक बचे हुए 50 प्रतिशत बाजारों में भी रात्रिकालीन सफाई का काम शुरू करा दिया जाएगा।
25 हजार कंपोस्ट किट बांटने का लक्ष्य
सीईओ ने बताया कि शहर में 25 हजार कंपोस्ट किट बांटने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक 15 हजार कंपोस्ट किट बांटी गई हैं। 10 हजार किट और बांटी जाएंगी। इसे बांटने के पीछे प्राधिकरण की सोच यह है कि लोग घरों में कूड़े का निस्तारण करें। जहां-जहां यह बंट चुकी हैं उन्हें अनिवार्य रूप से इसे उपयोग में लाना है। वहीं, जहां-जहां किट नहीं नहीं बंटी हैं। वहां-वहां इस किट को खरीदकर अमल में लाया जाना चाहिए। यह काफी सस्ती किट हैं। प्राधिकरण केवल सांकेतिक तौर पर इसे बांट रहा है।
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क्या होता है क्यूआर कोड
क्यूआर कोड का मतलब क्वीक रिस्पांस कोड होता है। यह एक प्रकार का मैट्रिक्स बार कोड होता है। इसे मोबाइल या मशीन से स्कैन करने पर पूरा डाटा संग्रहीत हो जाता है।
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नोएडा। अब क्वीक रिस्पांस कोड (क्यूआर कोड) से पता चलेगा कि लोगों के घर से कूड़ा उठा या नहीं। नोएडा प्राधिकरण इसके माध्यम से निगरानी रखेगा। इससे प्राधिकरण के पास डोर टू डोर कूड़ा उठाने के बाबत ऑनलाइन डाटा भी उपलब्ध रहेगा। यह जानकारी सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में 67 गांवों के प्रतिनिधियों के साथ साफ-सफाई की कार्यशाला में संवाद के दौरान प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी ने की।
उन्होंने कहा कि नोएडा के सभी घरों के बाहर क्यूआर कोड की प्लेट लगेंगी। जब कूड़े की गाड़ी घर के बाहर पहुंचेगी तो कूड़ा उठाने के बाद क्यूआर कोड को स्कैन करना जरूरी होगा। इसकी स्कैनिंग से यह पता चल जाएगा कि कूड़े की गाड़ी उस घर तक गई। अभी हाईराइज सोसाइटियों के गेट पर इसे लगाने का काम चल रहा है। जल्द ही सेक्टरों के घरों में भी प्लेट लगेंगी। सीईओ ने कहा कि अभी तक शहर के 50 प्रतिशत बाजारों में रात्रिकालीन सफाई का काम शुरू किया गया है। दिसंबर के अंत तक बचे हुए 50 प्रतिशत बाजारों में भी रात्रिकालीन सफाई का काम शुरू करा दिया जाएगा।
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25 हजार कंपोस्ट किट बांटने का लक्ष्य
सीईओ ने बताया कि शहर में 25 हजार कंपोस्ट किट बांटने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभी तक 15 हजार कंपोस्ट किट बांटी गई हैं। 10 हजार किट और बांटी जाएंगी। इसे बांटने के पीछे प्राधिकरण की सोच यह है कि लोग घरों में कूड़े का निस्तारण करें। जहां-जहां यह बंट चुकी हैं उन्हें अनिवार्य रूप से इसे उपयोग में लाना है। वहीं, जहां-जहां किट नहीं नहीं बंटी हैं। वहां-वहां इस किट को खरीदकर अमल में लाया जाना चाहिए। यह काफी सस्ती किट हैं। प्राधिकरण केवल सांकेतिक तौर पर इसे बांट रहा है।
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क्या होता है क्यूआर कोड
क्यूआर कोड का मतलब क्वीक रिस्पांस कोड होता है। यह एक प्रकार का मैट्रिक्स बार कोड होता है। इसे मोबाइल या मशीन से स्कैन करने पर पूरा डाटा संग्रहीत हो जाता है।