Budget 2024: किसी ने बताया अच्छा... कोई दिखा निराश, जानें बजट पर नोएडा के लोगों ने क्या दी राय
Budget 2024: बढ़ती महंगाई से परेशान मध्यवर्ग को इस बजट में कुछ खास नहीं मिल पाया है। गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में बतौर असिस्टेंट मैनेजर काम करने वाले रंजीत झा कहते हैं कि अगर 10 लाख तक की आय को कर के दायरे से बाहर कर दें तो बहुत राहत मिलती।
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Budget 2024: लोकसभा चुनाव से पहले आए अंतरिम बजट से गौतमबुद्धनगर के उद्यमियों को बहुत उम्मीद थी। उद्यमियों को इसके उलट निराशा ही हुई। उद्योगों को टैक्स में रियायत से लेकर व्यक्तिगत आयकर में भी कोई बदलाव नहीं किया। ऐसे में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इसे महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है। हालांकि, कुछ उद्यमियों का यह भी कहना है कि 2047 में विकसित देश बनाए जाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। ऐसे में चुनावी घोषणाएं करने की जगह सरकार ने आधारभूत ढ़ांचे को मजबूत करने पर ध्यान दिया है। सरकार की यह कोशिश रही है कि लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़े।
एमएसएमई सेक्टर की उम्मीद पूरी नहीं हुई
लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले बजट से एमएसएमई सेक्टर को काफी उम्मीदें थीं। यह लेकिन मिनी बजट रहा। कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई जिससे उद्याेगों को मजबूती मिलती। हालांकि, बजट के जरिए 2047 तक विकसित भारत के रोडमैप को जरूर पूरा करने की कोशिश की गई है। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन सात लाख तक की आमदनी पर टैक्स से पूरी तरह छूट देकर मध्यम वर्ग को राहत जरूर दी गई है। नई सरकार के गठन के बाद पेश होने वाले आम बजट में भी टैक्स से राहत बरकरार रही तो निश्चित तौर पर इसका सही लाभ मध्यम वर्ग को मिलेगा। लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ने से कारोबार को गति मिलेगी।--- मनीष गुप्ता, चेयरमैन, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन नोएडा
बजट अच्छा, उद्योगों की मांग अधूरी
केंद्र सरकार का अंतरिम बजट से अधिक उम्मीद नहीं होनी चाहिए थे। अंतरिम बजट के मुताबिक सरकार ने पूरी कोशिश अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की की है। उद्योगों को लेकिन इस बार टैक्स में रियायत और बेहतर नियंत्रण प्रणाली की जरूरत थी। उद्योगों में काम करने वाले लोगों की आवासीय सुविधा के लिए घोषणा होनी चाहिए थी। इसके अलावा जीएसटी की प्रक्रिया को और अधिक सरल व इनकम टैक्स की तरह फेसलेस किया जाना चाहिए।--- विपिन मल्हन, अध्यक्ष, नोएडा एंटरप्रिन्यार्स एसोसिएशन
2047 में विकसित भारत की तरफ बढ़े
क्योंकि यह अंतरिम बजट है ऐसे में कारोबारी एवं निर्यातकों को बजट से ज़्यादा उम्मीदें नहीं करनी चाहिए। सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन नहीं किया है। यही इंडस्ट्रीज़ के लिए एक बड़ा क़दम है। भारत में जो विकास की दर है, वह पहले ही औसतन ज्यादा है। इसमें बदलाव नहीं करना ही अच्छा हुआ है। दूध उत्पादन को दोगुना करने की बात कही गई है। इसके दूरगामी फायदे होंगे। इसके अलावा लखपति दीदी योजना के द्वारा सरकार में महिलाओं में रोज़गार की व्यवस्था की है। अभी तक एक करोड़ लखपति दीदी बन चुकी हैं। इसका लक्ष्य अब तीन करोड़ रखा गया है। सरकार महिला सशक्तीकरण के अलावा युवाओं एवं छोटे उद्योगों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहती है। इससे ही 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होगा। --- सीपी शर्मा, अध्यक्ष, हैंडलूम्स हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन
बजट पर अर्थशास्त्री से बातचीत
यह बजट बुनियादी ढांचे, राजकोषीय समेकन, कृषि, पर्यटन, लॉजिस्टिक, हरित विकास और रेलवे पर केंद्रित है। कर दरों में बदलाव नहीं होने से वेतनभोगियों को निराशा हुई। सबसे अच्छी बात यह है कि लखपति दीदी योजना के लक्ष्य को दो से बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया गया है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, बल्कि माइक्रो फाइनेंसरों और स्वयं सहायता समूहों की मांग भी पूरी होगी। ---- डॉ. (प्रो.) जितिन जंभीर, अर्थशास्त्री, आईएमएस कॉलेज, नोएडा
उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप एक प्रगतिशील बजट है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन प्रदान करने से उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। 10 वर्षो में उच्च शिक्षा में 28 प्रतिशत महिला नामांकन में वृद्धि सहित एसटीईएम पाठयक्रमों में 43 प्रतिशत महिला नामांकन के साथ सभी क्षेत्रों में महिला कार्यबल का उदय होगा। बजट, तकनीक प्रेमी युवाओं के लिए स्वर्ण युग पर केंद्रित है। ---- डॉ. (प्रो.) बलविंदर शुक्ला, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर, शिक्षाविद् और अर्थशास्त्री
अगर टैक्स स्लैब में होता बदलाव तो मिलता फायदा
बढ़ती महंगाई से परेशान मध्यवर्ग को इस बजट में कुछ खास नहीं मिल पाया है। वह सालाना 10 लाख तक की आय को कर के दायरे से बाहर रखने की उम्मीद लगाए थे। टैक्स स्लैब में सकारात्मक बदलाव न होना उनके लिए निराशा भरा रहा है। सेक्टर- 73 में रहने वाले रंजीत झा के परिवार का कहना है यह तो अंतरिम बजट है। अब उनकी निगाहें नई सरकार बनने के बाद जारी होने वाले बजट पर टिकी हैं।
कुछ खास नहीं है इस अंतरिम बजट में
गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में बतौर असिस्टेंट मैनेजर काम करने वाले रंजीत झा कहते हैं कि अगर 10 लाख तक की आय को कर के दायरे से बाहर कर देते तो सालाना करीब 25 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। इसको अच्छी जगह निवेश कर पाते। बढ़ती महंगाई में टैक्स स्लैब में बदलाव जरूरी था। वह कहते हैं कि मोटा-मोटा देखें तो अकेले रसोई पर ही हर महीने में 20 से 25 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। बुढ़ापे को सुरक्षित करना भी जरूरी है। इसलिए हर महीने नेशनल पेंशन स्कीम और अन्य योजना में 10 हजार रुपये निवेश करते हैं। बस यही उनकी बचत हैं।
कमाई का बड़ा हिस्सा पढ़ाई पर खर्च
रंजीत की पत्नी पुष्पा झा बताती हैं कि बड़ा बेटा बाहर रहकर इंजीनियरिंग कर रहा है। उसकी पढ़ाई पर महीने में 20 हजार से ज्यादा खर्च आ रहा है। छोटा बेटा प्राइवेट स्कूल में 9 वीं कक्षा में पढ़ रहा। इनकी पढ़ाई पर भी 10 से 12 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं। एडमिशन के दौरान यह खर्च और बढ़ जाता है। वह कहती हैं कि छोटे बेटे की उच्च शिक्षा के लिए बचत भी जरूरी है।
परिवार की मौजूदा आमदनी और खर्च
सालाना आमदनी- 12 लाख रुपये
मासिक खर्च
खानपान- 20 से 25 हजार रुपये
होम लोन की ईएमआई- 19 हजार रुपये
परिवहन का खर्चा- 10 हजार रुपये
अन्य खर्चा- 8000 रुपये
बच्चों की पढ़ाई- 30 से 35 हजार रुपये
बचत- 10 हजार रुपये