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Noida News: स्कूलों में अब डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य
Sun, 12 Oct 2025 12:37 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी विद्यालय मुखियाओं को आदेश जारी किए हैं। अगर किसी विद्यालय में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग नहीं किया जा रहा होगा तो इसके लिए विद्यालय मुखिया व कक्षा प्रभारी जिम्मेदार माने जाएंगे।
इसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को रोचक व आसान बनाना है। विभाग का मानना है कि वीडियो, चित्र और ऑडियो के माध्यम से छात्र जटिल विषयों को जल्दी समझ सकते हैं। इसी उद्देश्य से राजकीय विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड लगवाए गए थे। इसके अलावा प्रदेश के विद्यालयों में अन्य कई तरह की डिजिटल सुविधाएं भी दी जा रही हैं। पढ़ाई को भी कोरोना के बाद से पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया गया है। इससे पढ़ने और पढ़ाने का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ दिनों से डिजिटल सुविधाओं की अधिकारियों ने समीक्षा की थी। समीक्षा में कई विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड या तो बंद पड़े मिले, या फिर बोर्ड का प्रयोग करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। अब शिक्षा विभाग ने इसे सख्ती से लागू किया है।
ठीक करवाने होंगे स्कूलों के डिजिटल बोर्ड
कई विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत विद्यालय मुखियाओं को अपने स्तर पर करवानी होगी। अगर डिजिटल बोर्ड अभी भी गारंटी में हैं तो उनको कंपनी के माध्यम से ठीक करवाया जाएगा। अगर गांरटी में नहीं हैं तो उसे बाजार से ठीक करवाना होगा, ताकि बच्चों को डिजिटल सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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सभी राजकीय विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड का नियमित रूप से प्रयोग करने के लिए विद्यालय मुखियाओं को आदेश दिए हैं। अगर किसी विद्यालय में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग करते नहीं पाया गया तो विद्यालय मुखिया व इंचार्ज की जवाबदेही तय की जाएगी।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत
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पानीपत। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग अनिवार्य है। शिक्षा विभाग ने इसके लिए सभी विद्यालय मुखियाओं को आदेश जारी किए हैं। अगर किसी विद्यालय में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग नहीं किया जा रहा होगा तो इसके लिए विद्यालय मुखिया व कक्षा प्रभारी जिम्मेदार माने जाएंगे।
इसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से पढ़ाई को रोचक व आसान बनाना है। विभाग का मानना है कि वीडियो, चित्र और ऑडियो के माध्यम से छात्र जटिल विषयों को जल्दी समझ सकते हैं। इसी उद्देश्य से राजकीय विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड लगवाए गए थे। इसके अलावा प्रदेश के विद्यालयों में अन्य कई तरह की डिजिटल सुविधाएं भी दी जा रही हैं। पढ़ाई को भी कोरोना के बाद से पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफार्म पर लाया गया है। इससे पढ़ने और पढ़ाने का तरीका भी बदला है। पिछले कुछ दिनों से डिजिटल सुविधाओं की अधिकारियों ने समीक्षा की थी। समीक्षा में कई विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड या तो बंद पड़े मिले, या फिर बोर्ड का प्रयोग करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। अब शिक्षा विभाग ने इसे सख्ती से लागू किया है।
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ठीक करवाने होंगे स्कूलों के डिजिटल बोर्ड
कई विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड खराब पड़े हैं। उनकी मरम्मत विद्यालय मुखियाओं को अपने स्तर पर करवानी होगी। अगर डिजिटल बोर्ड अभी भी गारंटी में हैं तो उनको कंपनी के माध्यम से ठीक करवाया जाएगा। अगर गांरटी में नहीं हैं तो उसे बाजार से ठीक करवाना होगा, ताकि बच्चों को डिजिटल सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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सभी राजकीय विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड का नियमित रूप से प्रयोग करने के लिए विद्यालय मुखियाओं को आदेश दिए हैं। अगर किसी विद्यालय में डिजिटल बोर्ड का प्रयोग करते नहीं पाया गया तो विद्यालय मुखिया व इंचार्ज की जवाबदेही तय की जाएगी।
- राकेश बूरा, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत