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Noida News: चार साल के नमूनों से तय होगा डेंगू का इलाज
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चार साल के नमूनों से तय होगा डेंगू का इलाज
- करीब 1200 नमूनों की जांच कर तय किया जा रहा मार्कर
- गंभीर होने वाले मरीजों को जांच में किया जा सकेगा चिह्नित
- नोएडा के चाइल्ड पीजीआई ने शुरू किया प्रोजेक्ट
अतुल भारद्वाज
नोएडा। पिछले चार साल के डेंगू पॉजिटिव मरीजों के खून के नमूनों से भविष्य में बीमारी का इलाज तय होगा। इसके लिए नोएडा का चाइल्ड पीजीआई करीब 1200 नमूनों के ऊपर परीक्षण कर रहा है। इस परीक्षण में डेंगू की जांच के लिए नए मार्कर तय किए जाने हैं। इसका फायदा यह होगा कि डेंगू पॉजिटिव आने पर कौन मरीज अगले 48 घंटे में गंभीर हो सकता है। इसका सटीक आकलन हो पाएगा। इससे मरीज का समय पर इलाज भी शुरू हो पाएगा।
चाइल्ड पीजीआई का माइक्रोबायलॉजी विभाग इस परीक्षण को शुरू कर रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने आरटीपीसीआर जांच किट माइक्रोबायलॉजी विभाग को उपलब्ध कराई हैं। किट से 2023 के नमूनों के अलावा 2020 से 2022 के पुराने नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। इस परीक्षण में सभी चार सीरोटाइप डेनवी-1, डेनवी-2, डेनवी-3, डेनवी-4 में आ रहे बदलाव और इसके असर को देखा जाना है। साल दर साल क्या बदलाव और प्रभाव मरीजों पर हुए। इसका भी आकलन विशेषज्ञ टीम करेगी। नोएडा के अलावा आसपास के जिलों के नमूने भी परीक्षण में शामिल किए गए हैं। इससे डेंगू के अलग-अलग सीरोटाइप का भौगोलिक रूप से असर भी पता चलेगा।
चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. सुमी नंदवानी का कहना है कि अभी ऐसा कोई मार्कर नहीं है। इससे यह पता चल सके कि कौन मरीज गंभीर हो सकता है। एलाइजा टेस्ट भी इसमें पूरी तरह कारगर नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि जो मरीज ओपीडी में सामान्य दिखता है। वह गंभीर हो जाता है। नए परीक्षण के सफल होने पर बने मार्कर से ऐसे मरीजों को चिंहित किया जा सकेगा। संस्थान में ही माइक्रोबायलॉजिस्ट डॉ. एनपी सिंह का कहना है कि यह परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मरीजों को जहां खतरा कम किया जा सकेगा वहीं, डेंगू से मौत के मामले भी बहुत कम हो जाएंगे।
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इनसेट-
25 नमूनों पर हुआ शुरुआती परीक्षण
डॉ. नंदवानी ने बताया कि अभी 25 नमूनों पर इसका शुरुआती परीक्षण किया गया है जोकि सफल रहा। इन नमूनों में सीरोटाइप डेनवी-2 के सर्वाधिक 22 मरीज मिले। वहीं, डेनवी-1 के दो और डेनवी-3 का एक मामला मिला। लेकिन, किसी मार्कर या आकलन के लिए अधिक संख्या में केस पर परीक्षण की जरूरत है। इसके बाद ही अंतिम रूप से निष्कर्ष निकाला जाएगा।
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- करीब 1200 नमूनों की जांच कर तय किया जा रहा मार्कर
- गंभीर होने वाले मरीजों को जांच में किया जा सकेगा चिह्नित
- नोएडा के चाइल्ड पीजीआई ने शुरू किया प्रोजेक्ट
अतुल भारद्वाज
नोएडा। पिछले चार साल के डेंगू पॉजिटिव मरीजों के खून के नमूनों से भविष्य में बीमारी का इलाज तय होगा। इसके लिए नोएडा का चाइल्ड पीजीआई करीब 1200 नमूनों के ऊपर परीक्षण कर रहा है। इस परीक्षण में डेंगू की जांच के लिए नए मार्कर तय किए जाने हैं। इसका फायदा यह होगा कि डेंगू पॉजिटिव आने पर कौन मरीज अगले 48 घंटे में गंभीर हो सकता है। इसका सटीक आकलन हो पाएगा। इससे मरीज का समय पर इलाज भी शुरू हो पाएगा।
चाइल्ड पीजीआई का माइक्रोबायलॉजी विभाग इस परीक्षण को शुरू कर रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने आरटीपीसीआर जांच किट माइक्रोबायलॉजी विभाग को उपलब्ध कराई हैं। किट से 2023 के नमूनों के अलावा 2020 से 2022 के पुराने नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। इस परीक्षण में सभी चार सीरोटाइप डेनवी-1, डेनवी-2, डेनवी-3, डेनवी-4 में आ रहे बदलाव और इसके असर को देखा जाना है। साल दर साल क्या बदलाव और प्रभाव मरीजों पर हुए। इसका भी आकलन विशेषज्ञ टीम करेगी। नोएडा के अलावा आसपास के जिलों के नमूने भी परीक्षण में शामिल किए गए हैं। इससे डेंगू के अलग-अलग सीरोटाइप का भौगोलिक रूप से असर भी पता चलेगा।
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चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. सुमी नंदवानी का कहना है कि अभी ऐसा कोई मार्कर नहीं है। इससे यह पता चल सके कि कौन मरीज गंभीर हो सकता है। एलाइजा टेस्ट भी इसमें पूरी तरह कारगर नहीं है। कई बार ऐसा होता है कि जो मरीज ओपीडी में सामान्य दिखता है। वह गंभीर हो जाता है। नए परीक्षण के सफल होने पर बने मार्कर से ऐसे मरीजों को चिंहित किया जा सकेगा। संस्थान में ही माइक्रोबायलॉजिस्ट डॉ. एनपी सिंह का कहना है कि यह परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मरीजों को जहां खतरा कम किया जा सकेगा वहीं, डेंगू से मौत के मामले भी बहुत कम हो जाएंगे।
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25 नमूनों पर हुआ शुरुआती परीक्षण
डॉ. नंदवानी ने बताया कि अभी 25 नमूनों पर इसका शुरुआती परीक्षण किया गया है जोकि सफल रहा। इन नमूनों में सीरोटाइप डेनवी-2 के सर्वाधिक 22 मरीज मिले। वहीं, डेनवी-1 के दो और डेनवी-3 का एक मामला मिला। लेकिन, किसी मार्कर या आकलन के लिए अधिक संख्या में केस पर परीक्षण की जरूरत है। इसके बाद ही अंतिम रूप से निष्कर्ष निकाला जाएगा।