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Noida News: एक्सप्रेसवे पर दनकौर जाने का नहीं लगा हुआ बोर्ड, भटक रहे लोग
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फोटो
-दनकौर के लोगों ने विरोध जताकर बोर्ड लगाने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दनकौर और बिलासपुर क्षेत्र के निवासियों ने यमुना एक्सप्रेसवे पर दनकौर का बोर्ड लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोग यमुना एक्सप्रेसवे से दनकौर की तरफ जाते है। यहां रेलवे स्टेशन के साथ अन्य ऐतिहासिक स्थल है, लेकिन एक्सप्रेसवे पर बोर्ड नहीं लगा होने के कारण लोगों को भटकना पड़ता है। प्रशासन व एक्सप्रेसवे प्रबंधक से दनकौर के लिए उतरने वाले कट पर बोर्ड लगाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दनकौर के पास यमुना एक्सप्रेसवे से उतरने का रैंप है, लेकिन वहां पर दनकौर जाने के लिए कोई दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगा है। जबकि बड़ी संख्या में लोग दनकौर जाते है। ऐसे में वो भटकते रहते है। निवासी संदीप जैन का कहना है कि दनकौर महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम हुआ करता था। जहां कौरव व पांडवों ने शिक्षक ली थी। ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर है। दनकौर रेलवे स्टेशन है, लेकिन एक्सप्रेस वे से उतरने के बाद लोग यहां तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। इसी चक्कर में कई बार लोग परी चौक पहुंच जाते है, जो 20 किमी दूर है।
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-दनकौर के लोगों ने विरोध जताकर बोर्ड लगाने की मांग की
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दनकौर और बिलासपुर क्षेत्र के निवासियों ने यमुना एक्सप्रेसवे पर दनकौर का बोर्ड लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में लोग यमुना एक्सप्रेसवे से दनकौर की तरफ जाते है। यहां रेलवे स्टेशन के साथ अन्य ऐतिहासिक स्थल है, लेकिन एक्सप्रेसवे पर बोर्ड नहीं लगा होने के कारण लोगों को भटकना पड़ता है। प्रशासन व एक्सप्रेसवे प्रबंधक से दनकौर के लिए उतरने वाले कट पर बोर्ड लगाने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दनकौर के पास यमुना एक्सप्रेसवे से उतरने का रैंप है, लेकिन वहां पर दनकौर जाने के लिए कोई दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगा है। जबकि बड़ी संख्या में लोग दनकौर जाते है। ऐसे में वो भटकते रहते है। निवासी संदीप जैन का कहना है कि दनकौर महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य का आश्रम हुआ करता था। जहां कौरव व पांडवों ने शिक्षक ली थी। ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर है। दनकौर रेलवे स्टेशन है, लेकिन एक्सप्रेस वे से उतरने के बाद लोग यहां तक आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। इसी चक्कर में कई बार लोग परी चौक पहुंच जाते है, जो 20 किमी दूर है।
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