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Noida News: एसआईटी ने दर्ज किए 125 अधिकारियों के बयान, कई की लड़खड़ाई जुबान
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- सेक्टर-150 हादसे की जांच कर रही एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण दफ्तर में डाला डेरा, देर रात तक की पूछताछ
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में मदद नहीं मिलने से डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की तफ्तीश जारी है। शुक्रवार को एसआइटी ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवानों से लेकर प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के बयान दर्ज किए। देर रात तक 125 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। इसके पहले एसआईटी ने इन विभागों से सवालों पर जवाब मांगे थे। अब बयान और सवालों के जवाब के आधार पर निष्कर्ष निकालकर एसआईटी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी। शुक्रवार को बयान दर्ज कराने पहुंचे कई जिम्मेदारों की जुबान एसआईटी के अधिकारियों के सामने लड़खड़ा गई। वहीं कई अधिकारी पसीने से तरबतर दिखे।
शुक्रवार को एसआईटी दोपहर करीब पौने दो बजे नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित दफ्तर पहुंची। एसआईटी की अगुवाई एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर कर रहे हैं। इसमें सदस्य के तौर पर मंडलायुक्त मेरठ भानू चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल हैं। अधिकारियों के पहुंचने पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम व नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ कृष्णा करुणेश मौजूद रहे। बयान दर्ज कराने के लिए अधिकारी कर्मचारी पहले से मौजूद थे।
एसडीआरएफ और अग्निश्मन विभाग की जो टीम मौके पर हादसे के समय गई थी उसमें शामिल एक-एक जवान के बयान एसआईटी में शामिल तीनों अधिकारियों ने अलग-अलग दर्ज किए। इसके साथ ही एनडीआरएफ से आए जवानों के भी बयान हुए। पुलिस से चौकी प्रभारी, नॉलेज पार्क थाना प्रभारी, एसीपी और डीसीपी व डॉयल-112 पर कॉल के बाद पहुंची पीआरवी पर तैनात जवान भी बयान के लिए बुलाए गए थे। सारे बयान बोर्ड रूम में दर्ज कराए गए।
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हादसे के बाद बचाव में देरी पर पूछे सवाल
एसआईटी के बयान दर्ज करने के दौरान सभी विभागों में अफरातफरी का माहौल दिखा। प्राधिकरण के भी सभी गेट बंद कर दिए गए थे। इस दौरान सिर्फ जांच अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी व बयान दर्ज कराने वालों को ही अंदर जाने दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आनन फानन में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अपने स्टेनो से संशोधित रिपोर्ट मंगवाई। उधर पुलिस प्रशासन ने मौके पर ही रिपोर्ट को संशोधित कराई। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट को बुलाया गया। प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल के बर्खास्त जेई नवीन कुमार के अलावा वरिष्ठ प्रबंधक विश्वास त्यागी के अलावा सिविल से वर्क सर्किल-10 के प्रबंधक अरविंद, वरिष्ठ प्रबंधक प्रवीन सलोनिया समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। इसमें उनसे पूछा गया कि घटना की सूचना कब मिली, इसके बाद आप लोगों ने क्या-क्या किया। एसडीआरएफ और फायर विभाग से पूछा गया कि जब आप लोग मौके पर पहुंच गए थे। युवराज की जान बचाने के लिए क्या क्या उपाय किए, इन उपायों में कहां कमी रह गई।
बयान और सवालों के जवाब में मिला विरोधाभास
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विभागों की तरफ से सवालों के जो लिखित जवाब एसआईटी को दिए गए और शुक्रवार को दर्ज हुए बयान में कई जगहों पर विरोधाभास मिला है। जवाब अधिकारियों ने तैयार करवाए थे। बयान निचले स्तर के कर्मचारी तक के दर्ज हुए। इस विरोधाभास को एसआईटी ने गहनता से नोट किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में मदद नहीं मिलने से डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की तफ्तीश जारी है। शुक्रवार को एसआइटी ने एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के जवानों से लेकर प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के बयान दर्ज किए। देर रात तक 125 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। इसके पहले एसआईटी ने इन विभागों से सवालों पर जवाब मांगे थे। अब बयान और सवालों के जवाब के आधार पर निष्कर्ष निकालकर एसआईटी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी। शुक्रवार को बयान दर्ज कराने पहुंचे कई जिम्मेदारों की जुबान एसआईटी के अधिकारियों के सामने लड़खड़ा गई। वहीं कई अधिकारी पसीने से तरबतर दिखे।
शुक्रवार को एसआईटी दोपहर करीब पौने दो बजे नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित दफ्तर पहुंची। एसआईटी की अगुवाई एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर कर रहे हैं। इसमें सदस्य के तौर पर मंडलायुक्त मेरठ भानू चंद्र गोस्वामी और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा शामिल हैं। अधिकारियों के पहुंचने पर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम व नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ कृष्णा करुणेश मौजूद रहे। बयान दर्ज कराने के लिए अधिकारी कर्मचारी पहले से मौजूद थे।
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एसडीआरएफ और अग्निश्मन विभाग की जो टीम मौके पर हादसे के समय गई थी उसमें शामिल एक-एक जवान के बयान एसआईटी में शामिल तीनों अधिकारियों ने अलग-अलग दर्ज किए। इसके साथ ही एनडीआरएफ से आए जवानों के भी बयान हुए। पुलिस से चौकी प्रभारी, नॉलेज पार्क थाना प्रभारी, एसीपी और डीसीपी व डॉयल-112 पर कॉल के बाद पहुंची पीआरवी पर तैनात जवान भी बयान के लिए बुलाए गए थे। सारे बयान बोर्ड रूम में दर्ज कराए गए।
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हादसे के बाद बचाव में देरी पर पूछे सवाल
एसआईटी के बयान दर्ज करने के दौरान सभी विभागों में अफरातफरी का माहौल दिखा। प्राधिकरण के भी सभी गेट बंद कर दिए गए थे। इस दौरान सिर्फ जांच अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी व बयान दर्ज कराने वालों को ही अंदर जाने दिया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आनन फानन में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अपने स्टेनो से संशोधित रिपोर्ट मंगवाई। उधर पुलिस प्रशासन ने मौके पर ही रिपोर्ट को संशोधित कराई। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट को बुलाया गया। प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल के बर्खास्त जेई नवीन कुमार के अलावा वरिष्ठ प्रबंधक विश्वास त्यागी के अलावा सिविल से वर्क सर्किल-10 के प्रबंधक अरविंद, वरिष्ठ प्रबंधक प्रवीन सलोनिया समेत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। इसमें उनसे पूछा गया कि घटना की सूचना कब मिली, इसके बाद आप लोगों ने क्या-क्या किया। एसडीआरएफ और फायर विभाग से पूछा गया कि जब आप लोग मौके पर पहुंच गए थे। युवराज की जान बचाने के लिए क्या क्या उपाय किए, इन उपायों में कहां कमी रह गई।
बयान और सवालों के जवाब में मिला विरोधाभास
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विभागों की तरफ से सवालों के जो लिखित जवाब एसआईटी को दिए गए और शुक्रवार को दर्ज हुए बयान में कई जगहों पर विरोधाभास मिला है। जवाब अधिकारियों ने तैयार करवाए थे। बयान निचले स्तर के कर्मचारी तक के दर्ज हुए। इस विरोधाभास को एसआईटी ने गहनता से नोट किया।