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आग से निपटने के लिए जिले में नहीं हैं पर्याप्त संसाधन
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पुन्हाना। नूंह को जिला बने करीब 16 साल हो गए है, लेकिन अभी तक यहां पर आग से निपटने के लिए फायर विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। करीब 15 लाख की आबादी पर सिर्फ 9 दमकल की गाड़ियां हैं, जिनमें से दो खराब पड़ी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर हर साल आग लगने के 200 से ज्यादा मामले सामने आते हैं। वहीं स्थिति यह है किफायर स्टेशन पर जनस्वास्थ्य विभाग ने न तो फायर हाईड्रेंट बनाया है और न ही पानी भरने के लिए कोई बोरिंग है। ऐसे में गाड़ियों को इधर-उधर से पानी भरकर काम चलाना पड़ता है।
मई 2005 में गुरुग्राम से अलग कर नूंह को जिला बनाया गया था। कहने को तो जिले में चार फायर स्टेशन हैं, लेकिन पुन्हाना और तावडू को अभी तक मंजूरी ही नहीं मिल सकी है। विभाग के नियमानुसार 50 हजार की आबादी पर एक दमकल की गाड़ी होना जरूरी है। इस हिसाब से जिले में 25 से अधिक गाड़ियां होनी चाहिए थीं। लेकिन आलम यह है कि यहां पर सिर्फ 9 ही गाड़ियां हैं। उनमें से भी देखा जाए, तो दो काफी समय पहले ही कंडम हो चुकी है। जिसे बदलने के लिए आज तक कोई भी प्रयास नहीं किया गया है। इतना ही नहीं जिले में फायर ऑफिसर, दो डिप्टी फायर ऑफिसर और 6 लीडिंग फायरमैन के पद काफी समय से खाली पड़े हैं। जिले में हर साल 200 से अधिक आग की घटनाएं हो जाती है। मार्च से जून तक करीब 95 फीसदी आग की घटनाएं होती है। ज्यादा घटनाएं होने पर उनको पलवल, गुरुग्राम, सोहना व होडल से गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं।
जिले के समाज सेवी दीन मोहम्मद मामलीका, फजरूदीन बेसर, रशीद का कहना है कि जिले में 443 गांव, 325 ग्राम पंचायतें, 6 शहर व 20 हजार से अधिक की आबादी वाले करीब 15 गांव हैं। अधिकतर आग फसल के समय लगती है। जब तक फायर विभाग की गाड़ी आती है तब तक फसल या कोई मकान जल जाता है।
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जिले में नहीं हैं फायर हाईड्रेंट
फायर ऑफिसर लेखराम ने बताया कि नूंह जिले में जनस्वास्थ्य विभाग ने एक भी फायर हाईड्रेंट नहीं बनाया हैं, जबकि कम से कम 14 फायर हाईड्रेंट होने चाहिए। इसके अलावा जनस्वास्थ्य विभाग ने दमकल की गाड़ियों में पानी भरने के लिए एक भी बोरिंग नहीं की है। फिरोजपुर झिकर में तो वे गोशाला से पानी भरकर लाते है। नूंह में नंगली रोड पर एक बोरिंग किया गया था, जो कि अभी तक चालू नहीं हो सका है।
2006 से 2020 तक हुईं घटनाएं
वर्ष घटनाएं
2006 12
2007 45
2008 67
2009 130
2010 60
2011 67
2012 62
2013 153
2014 156
2015 80
2016 144
2017 152
2018 161
2019 159
2020 167
वर्जन-
हाईड्रेंट बनाने का काम फायर विभाग का है। नूंह में दमकल की गाड़ी में पानी भरने के लिए एक बोरिंग किया हुआ है। विभाग की ओर से इसके अतिरिक्त और बनाने की मांग की जाएगी, तो और बोरिंग करा दी जाएगी। - फैसल इब्राहीम, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग नूंह
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मई 2005 में गुरुग्राम से अलग कर नूंह को जिला बनाया गया था। कहने को तो जिले में चार फायर स्टेशन हैं, लेकिन पुन्हाना और तावडू को अभी तक मंजूरी ही नहीं मिल सकी है। विभाग के नियमानुसार 50 हजार की आबादी पर एक दमकल की गाड़ी होना जरूरी है। इस हिसाब से जिले में 25 से अधिक गाड़ियां होनी चाहिए थीं। लेकिन आलम यह है कि यहां पर सिर्फ 9 ही गाड़ियां हैं। उनमें से भी देखा जाए, तो दो काफी समय पहले ही कंडम हो चुकी है। जिसे बदलने के लिए आज तक कोई भी प्रयास नहीं किया गया है। इतना ही नहीं जिले में फायर ऑफिसर, दो डिप्टी फायर ऑफिसर और 6 लीडिंग फायरमैन के पद काफी समय से खाली पड़े हैं। जिले में हर साल 200 से अधिक आग की घटनाएं हो जाती है। मार्च से जून तक करीब 95 फीसदी आग की घटनाएं होती है। ज्यादा घटनाएं होने पर उनको पलवल, गुरुग्राम, सोहना व होडल से गाड़ियां मंगवानी पड़ती हैं।
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जिले के समाज सेवी दीन मोहम्मद मामलीका, फजरूदीन बेसर, रशीद का कहना है कि जिले में 443 गांव, 325 ग्राम पंचायतें, 6 शहर व 20 हजार से अधिक की आबादी वाले करीब 15 गांव हैं। अधिकतर आग फसल के समय लगती है। जब तक फायर विभाग की गाड़ी आती है तब तक फसल या कोई मकान जल जाता है।
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जिले में नहीं हैं फायर हाईड्रेंट
फायर ऑफिसर लेखराम ने बताया कि नूंह जिले में जनस्वास्थ्य विभाग ने एक भी फायर हाईड्रेंट नहीं बनाया हैं, जबकि कम से कम 14 फायर हाईड्रेंट होने चाहिए। इसके अलावा जनस्वास्थ्य विभाग ने दमकल की गाड़ियों में पानी भरने के लिए एक भी बोरिंग नहीं की है। फिरोजपुर झिकर में तो वे गोशाला से पानी भरकर लाते है। नूंह में नंगली रोड पर एक बोरिंग किया गया था, जो कि अभी तक चालू नहीं हो सका है।
2006 से 2020 तक हुईं घटनाएं
वर्ष घटनाएं
2006 12
2007 45
2008 67
2009 130
2010 60
2011 67
2012 62
2013 153
2014 156
2015 80
2016 144
2017 152
2018 161
2019 159
2020 167
वर्जन-
हाईड्रेंट बनाने का काम फायर विभाग का है। नूंह में दमकल की गाड़ी में पानी भरने के लिए एक बोरिंग किया हुआ है। विभाग की ओर से इसके अतिरिक्त और बनाने की मांग की जाएगी, तो और बोरिंग करा दी जाएगी। - फैसल इब्राहीम, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग नूंह