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रोजगार की तलाश में आने वालों के लिए बनेंगे आश्रय स्थल-रैन बसेरे
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ग्रेटर नोएडा। जिले में रोजगार की तलाश में आने वाले युवक-युवतियों और बेसहारा लोगों के लिए ग्रेनो प्राधिकरण आशियाना बनाने जा रहा है। ग्रेनो प्राधिकरण ने ईकोटेक-3 सेक्टर में 3500 वर्ग मीटर में श्रमिक आश्रय स्थल और रैन बसेरा बनाने का निर्णय लिया है। यह हर जरूरी सुविधाओं से लैस होंगे। इनका डिजाइन भी तैयार कर लिया गया है। निविदा जल्द जारी होगी।
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक नगरी में प्रदेश के दूरदराज जिलों और दूसरे प्रदेशों से जरूरतमंद अक्सर रोजगार की तलाश में आते हैं। उनके सामने सिर छिपाने के लिए जगह तलाशना भी चुनौती भरा होता है। वे उस समय आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे होते हैं। ज्यादा पैसे देकर किराये का घर लेने में सक्षम नहीं होते। कई बार ऐसे गरीब-मजदूरों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ती है। शासन की मंशा पर प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने ईकोटेक थ्री में श्रमिक (मजदूर) आश्रय स्थल और उसी के पास रैन बसेरा बनाने का निर्णय लिया है। 3500 वर्ग मीटर में बनने वाले आश्रय स्थल के लिए प्राधिकरण के नियोजन विभाग ने डिजाइन तैयार कर लिया है। अब इसका एस्टीमेट बन रहा है। इस पर मुहर लगने के बाद निविदा जारी होगी। प्राधिकरण की मंशा है कि इसे जल्द बना दिया जाए, ताकि जरूरतमंदों को सहारा मिल सके।
अलग-अलग होंगे पुरुष और महिला ब्लॉक
आश्रय स्थल दो हिस्सों में होगा। एक में पुरुष ब्लॉक और दूसरे में महिला ब्लॉक होगा। पुरुष में 48 और महिला में 36 महिलाएं रह सकेंगी। इसमें डाइनिंग एरिया, किचन, केयर टेकर ऑफिस, रिकॉर्ड रूम, कॉमन रूम और प्ले एरिया होगा। महिलाएं और पुरुषों के लिए अलग शौचालय होंगे। किचन में ढाबा खुलेगा। इसमें यहां रहने वाले लोग खाना भी खा सकेंगे। इसके कुछ हिस्से में ग्रीन एरिया भी होगा। इसके अलावा सिक्योरिटी ऑफिस, चेक पोस्ट और बरामदा भी रहेगा।
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ऐसा होगा स्थानीय रैन बसेरा
प्राधिकरण हर साल सदी में रैन बसेरा बनवाता है। अब प्राधिकरण ने स्थायी रैन बसेरा बनाने का निर्णय लिया है। इसमें महिलाएं और पुरुषों के लिए 48-48 बेड होंगे। उनके लिए अलग-अलग शौचालय बने होंगे। पीने का पानी, स्टोर रूम आदि बनाए जाएंगे। ये एक मंजिला इमारत होगी।
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प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक नगरी में प्रदेश के दूरदराज जिलों और दूसरे प्रदेशों से जरूरतमंद अक्सर रोजगार की तलाश में आते हैं। उनके सामने सिर छिपाने के लिए जगह तलाशना भी चुनौती भरा होता है। वे उस समय आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे होते हैं। ज्यादा पैसे देकर किराये का घर लेने में सक्षम नहीं होते। कई बार ऐसे गरीब-मजदूरों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ती है। शासन की मंशा पर प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण ने ईकोटेक थ्री में श्रमिक (मजदूर) आश्रय स्थल और उसी के पास रैन बसेरा बनाने का निर्णय लिया है। 3500 वर्ग मीटर में बनने वाले आश्रय स्थल के लिए प्राधिकरण के नियोजन विभाग ने डिजाइन तैयार कर लिया है। अब इसका एस्टीमेट बन रहा है। इस पर मुहर लगने के बाद निविदा जारी होगी। प्राधिकरण की मंशा है कि इसे जल्द बना दिया जाए, ताकि जरूरतमंदों को सहारा मिल सके।
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अलग-अलग होंगे पुरुष और महिला ब्लॉक
आश्रय स्थल दो हिस्सों में होगा। एक में पुरुष ब्लॉक और दूसरे में महिला ब्लॉक होगा। पुरुष में 48 और महिला में 36 महिलाएं रह सकेंगी। इसमें डाइनिंग एरिया, किचन, केयर टेकर ऑफिस, रिकॉर्ड रूम, कॉमन रूम और प्ले एरिया होगा। महिलाएं और पुरुषों के लिए अलग शौचालय होंगे। किचन में ढाबा खुलेगा। इसमें यहां रहने वाले लोग खाना भी खा सकेंगे। इसके कुछ हिस्से में ग्रीन एरिया भी होगा। इसके अलावा सिक्योरिटी ऑफिस, चेक पोस्ट और बरामदा भी रहेगा।
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ऐसा होगा स्थानीय रैन बसेरा
प्राधिकरण हर साल सदी में रैन बसेरा बनवाता है। अब प्राधिकरण ने स्थायी रैन बसेरा बनाने का निर्णय लिया है। इसमें महिलाएं और पुरुषों के लिए 48-48 बेड होंगे। उनके लिए अलग-अलग शौचालय बने होंगे। पीने का पानी, स्टोर रूम आदि बनाए जाएंगे। ये एक मंजिला इमारत होगी।