{"_id":"691b706cc2d7ed68b8044c87","slug":"self-help-groups-are-changing-the-fate-of-women-na-news-c-123-1-bdn1036-151045-2025-11-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: स्वयं सहायता समूहों से बदल रही महिलाओं की तकदीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: स्वयं सहायता समूहों से बदल रही महिलाओं की तकदीर
Tue, 18 Nov 2025 12:28 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:28 AM IST
विज्ञापन
बदायूं। जिले की महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए चलाया जा रहा स्वयं सहायता समूहों का अभियान सफल साबित हो रहा है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित 19 हजार स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जिले में करीब दो लाख महिलाएं अब रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन रहीं हैं।
इन समूहों के माध्यम से महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, अगरबत्ती निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, बकरी पालन, जैविक खेती, हर्बल उत्पाद, रेडीमेड वस्त्र निर्माण जैसे कार्यों में जुटी हैं। समूहों को बैंक से ऋण सुविधा व शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अब अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। पहले जो महिलाएं घर तक सीमित थीं, वे अब अपने गांवों में छोटे उद्योग चला रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि समूहों के जरिए महिलाओं को रोजगार का स्थायी साधन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ी है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास भी आया है। आने वाले समय में समूहों की संख्या और बढ़ाकर अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
कैंटीन चला मिला रोजगार
बरातेगदार गांव की रहने वाली रेनू राठौर स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कैंटीन चलाने का काम कर रहीं हैं। इनके साथ कई अन्य महिलाएं भी जुड़ी हैं। इस काम से इन सभी को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
ड्रोन दीदी बन मिला रोजगार
ब्योर गांव की रहने वाली पूजा सिंह स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कृषि विभाग से जुड़कर ड्रोन दीदी का काम कर रही है। यह ड्रोन के माध्यम से फसलों को कीट से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव करने का काम करती है। इनके साथ एक दर्जन से अधिक महिलाएं जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
जिले में इस समय 19 हजार स्वयं सहायता समूहों का संचालन हो रहा है। इससे करीब दो लाख महिलाएं जुड़ी हैं। समूहों के माध्यम से इन सभी महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। - बृजेंद्र शुक्ला, डीसी एनआरएलएम
विज्ञापन
इन समूहों के माध्यम से महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, अगरबत्ती निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, बकरी पालन, जैविक खेती, हर्बल उत्पाद, रेडीमेड वस्त्र निर्माण जैसे कार्यों में जुटी हैं। समूहों को बैंक से ऋण सुविधा व शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अब अपने घर की आर्थिक जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। पहले जो महिलाएं घर तक सीमित थीं, वे अब अपने गांवों में छोटे उद्योग चला रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
विज्ञापन
अधिकारियों का कहना है कि समूहों के जरिए महिलाओं को रोजगार का स्थायी साधन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल परिवार की आमदनी बढ़ी है, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास भी आया है। आने वाले समय में समूहों की संख्या और बढ़ाकर अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन
कैंटीन चला मिला रोजगार
बरातेगदार गांव की रहने वाली रेनू राठौर स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कैंटीन चलाने का काम कर रहीं हैं। इनके साथ कई अन्य महिलाएं भी जुड़ी हैं। इस काम से इन सभी को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
ड्रोन दीदी बन मिला रोजगार
ब्योर गांव की रहने वाली पूजा सिंह स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कृषि विभाग से जुड़कर ड्रोन दीदी का काम कर रही है। यह ड्रोन के माध्यम से फसलों को कीट से बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव करने का काम करती है। इनके साथ एक दर्जन से अधिक महिलाएं जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
जिले में इस समय 19 हजार स्वयं सहायता समूहों का संचालन हो रहा है। इससे करीब दो लाख महिलाएं जुड़ी हैं। समूहों के माध्यम से इन सभी महिलाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। - बृजेंद्र शुक्ला, डीसी एनआरएलएम