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मेरठ, आगरा, मैनपुरी, बदायूं समेत अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ : वित्तीय अनियमितता पर प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछे सवाल

Thu, 28 Dec 2023 01:38 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Dec 2023 01:38 AM IST
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Questions asked to authority officials on financial irregularities
वित्तीय अनियमितता पर प्राधिकरण के अधिकारियों से पूछे सवाल
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- ग्रेटर नोएडा पहुंची स्थानीय निकायों के प्रतिवेदनों की जांच संबंधी विधानसभा की उप समिति

- स्थानीय निधि लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में सामने आई थी 2300 करोड़ की गड़बड़ी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरण के अफसरों के विकास के नाम पर किए गए 2300 करोड़ के अनियमितता के खेल को उजागर करने के लिए बुधवार को लोकल फंड ऑडिट की टीम ग्रेटर नोएडा पहुंची। स्थानीय निकायों के प्रतिवेदनों की जांच संबंधी विधानसभा की उप समिति के सामने तीनों प्राधिकरण के अफसरों से सवाल पूछे गए। अधिकारियों से आपत्तियों पर जवाब मांगे गए। जवाब के आधार पर उप समिति मुख्य समिति को सिफारिश करेगी। इसके बाद आपत्तियों का निस्तारण होगा।
टीम की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों का जवाब देने के लिए तीनों प्राधिकरण के अधिकारी फाइलों के साथ गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के परिसर में पहुंचे। बुधवार सुबह 10 बजे से समिति की सुनवाई शुरू हुई। इसमें बेसिक शिक्षा परिषद, नगर पालिका और नगर परिषदों की आपत्तियों पर भी सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान उपसमिति से अध्यक्ष और साहिबाबाद के विधायक सुनील कुमार शर्मा, बदायूं के विधायक महेश गुप्ता, चांदपुर के विधायक स्वामी ओमवेश और मैनपुरी के विधायक बृजेश कठेरिया उपस्थित रहे। मेरठ और सहारनपुर मंडलों की ऑडिट आपत्तियों के सुनवाई के क्रम में यहां बैठक की गई।
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नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ संजय कुमार खत्री, एसीईओ सतीश पाल के अलावा सभी विभागों के डीजीएम और एजीएम मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि नोएडा प्राधिकरण की 16 आपत्तियों पर सुनवाई हुई। इसमें दो-तीन आपत्तियों के निस्तारण के लिए उप समिति सुनवाई करेगी। सिफारिशों के बाद मुख्य समिति इसका निस्तारण करेगी। वहीं यमुना की एक आपत्ति सुनी गई। वहीं ग्रेटर नोएडा की 20 आपत्तियां पर भी समिति ने सुनवाई की। इसमें पांच के निस्तारण के लिए सिफारिश की जाएगी।
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नई उप समिति करेगी सुनवाई
नोएडा की करीब 50 आपत्तियां हैं। इनमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता के आरोप लोकल फंड ऑडिट ने लगाए हैं। ऐसे में यह तय किया गया कि केवल नोएडा के मामलों की सुनवाई एक नई उप समिति का गठन किया जाए। यह उप समिति केवल नोएडा के अफसरों को बुलाकर सुनवाई करे और अपनी सिफारिशें भेजे ताकि इसका जल्द से जल्द निस्तारण हो सके।

यह है आपत्तियां, जांच के बाद तय होगा आरोप
लोकल फंड ऑडिट की ओर से लगाई गई आपत्तियों में जमीन अर्जित नहीं होने, बिना जमीन मिले काम शुरू कराने से पैसे की बर्बादी, बिना आदेश के काम कराने, मलबा उठाने में अनिमितता जैसे आरोप है। इसके अलावा स्वीकृत एफएआर पर सवाल, क्रय योग्य एफएआर की गलत गणना से आर्थिक क्षति, मुआवजे के तौर पर जमा किए गए पैसे का ब्याज न मिलने से नुकसान की बात भी कही गई है। इसमें आवंटन निरस्त न करने से क्षति, समय विस्तार देने से आर्थिक क्षति, जुर्माने की वसूली नहीं, जमीन अधिग्रहण में अनियमित भुगतान, काम से अधिक भुगतान, अनियमित भुगतान, बिना आवश्यकता के जमीन खरीदी से होने वाला नुकसान शामिल है।




यह है मामला
स्थानीय निधि लेखा परीक्षा के 2018-19 के वार्षिक प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विभागों के अलावा नोएडा, ग्रेनो और यमुना प्राधिकरणों की ऑडिट रिपोर्ट बीते दिनों विधानसभा में रखी गई। इसमें नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2015-16 और यमुना प्राधिकरण के वित्तीय वर्ष 2010-11 से 2015-16 के दौरान अलग-अलग कार्यों में करीब 2300 करोड़ की अनियमितता उजागर हुई। इसमें 81 आपत्तियां दर्ज कराई गई है।
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