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यूपी, दिल्ली और हरियाणा के प्रदूषणकारी उद्योगों में ऑनलाइन निगरानी सिस्टम लगाना अनिवार्य : एनजीटी
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-1,700 उद्योगों के बिना ओसीईएमएस के काम करने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और हरियाणा के अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों (जीपीआई) को आदेश दिया है कि वे जल्द से जल्द ऑनलाइन सतत अपशिष्ट निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित करें। यह आदेश अधिवक्ता इमरान अहमद की याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि करीब 1,700 उद्योग अब भी बिना ओसीईएमएस के काम कर रहे हैं। गंगा व यमुना जैसी नदियों में अनुपचारित अपशिष्ट छोड़ रहे हैं, जिससे गंभीर प्रदूषण हो रहा है।
एनजीटी की पीठ ने कहा कि 10 किलोलीटर प्रतिदिन से अधिक अपशिष्ट उत्सर्जित करने वाले उद्योगों के लिए पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस जैसे मापदंडों की रीयल-टाइम निगरानी अनिवार्य है, जबकि छोटे उद्योगों को फ्लो मीटर और वेब कैमरा लगाना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) को निर्देश दिया कि वे सभी दोषी इकाइयों में ओसीईएमएस की तत्काल स्थापना सुनिश्चित करें। एनजीटी ने यह भी आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार के एसपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) दो महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सीपीसीबी को भेजें। जबकि केंद्रीय बोर्ड एक महीने में दोषी उद्योगों के खिलाफ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करे। तीन महीने के भीतर एनजीटी को विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भेजी जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और हरियाणा के अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों (जीपीआई) को आदेश दिया है कि वे जल्द से जल्द ऑनलाइन सतत अपशिष्ट निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) स्थापित करें। यह आदेश अधिवक्ता इमरान अहमद की याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि करीब 1,700 उद्योग अब भी बिना ओसीईएमएस के काम कर रहे हैं। गंगा व यमुना जैसी नदियों में अनुपचारित अपशिष्ट छोड़ रहे हैं, जिससे गंभीर प्रदूषण हो रहा है।
एनजीटी की पीठ ने कहा कि 10 किलोलीटर प्रतिदिन से अधिक अपशिष्ट उत्सर्जित करने वाले उद्योगों के लिए पीएच, बीओडी, सीओडी, टीएसएस जैसे मापदंडों की रीयल-टाइम निगरानी अनिवार्य है, जबकि छोटे उद्योगों को फ्लो मीटर और वेब कैमरा लगाना जरूरी है। उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) को निर्देश दिया कि वे सभी दोषी इकाइयों में ओसीईएमएस की तत्काल स्थापना सुनिश्चित करें। एनजीटी ने यह भी आदेश दिया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार के एसपीसीबी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) दो महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सीपीसीबी को भेजें। जबकि केंद्रीय बोर्ड एक महीने में दोषी उद्योगों के खिलाफ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई करे। तीन महीने के भीतर एनजीटी को विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भेजी जाए।
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