{"_id":"6703ed36a9fd54722c0f9617","slug":"only-18-students-took-admission-on-60-seats-in-ma-economics-noida-news-c-1-gnd1002-2189355-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: एमए इकोनॉमिक्स में 60 सीटों पर महज 18 छात्रों ने लिया दाखिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: एमए इकोनॉमिक्स में 60 सीटों पर महज 18 छात्रों ने लिया दाखिला
विज्ञापन
एमए इकोनॉमिक्स में 60 सीटों पर महज 18 छात्रों ने लिया दाखिला
- 32 साल में 70 प्रतिशत सीटें खाली, 2010 के बाद लगातार गिर रहा ग्राफ, कॉलेज प्रबंधक सेमेस्टर प्रणाली को मान रहा वजह
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले के पहले सरकारी कॉलेज में 32 सालों में पहली बार एमए इकोनॉमिक्स में 70 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। यहां पर 60 सीटों पर सिर्फ 18 छात्रों ने ही दाखिला लिया है। यह हाल तब है, जब विश्वविद्यालय की ओर से दाखिले के लिए कई बार तिथि बढ़ाई गई। कॉलेज प्रबंधन का कहना है 2010 से सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद से एमए इकोनॉमिक्स में दाखिला लेने वाले छात्रों का ग्राफ कम हो रहा है। लेकिन इस बार जितने कम दाखिले कभी नहीं हुए।
छात्रों की मांग पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संबद्ध सेक्टर- 39 में चल रहे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 1992 में एमए इकोनॉमिक्स की पढ़ाई शुरू की गई थी। शुरुआत में एमए इकोनॉमिक्स में सबसे ज्यादा दाखिले हो रहे थे। सीट की तुलना में कई गुना छात्र आवेदन करते रहते थे। लेकिन 2010 के बाद से सेमेस्टर प्राणाली लागू हो गई। उसके बाद छात्रों के दाखिले कम होने शुरू हो गए।
शिक्षकों का कहना है, पहले छात्र दाखिला लेने के बाद सीधे पेपर देने आते थे। सत्र के दौरान बीच बीच में कभी-कभी कक्षाएं लेने आते थे। छात्रों की उपस्थिति कम होने पर भी ज्यादा परेशानी नहीं हाेती थी। कॉलेज स्तर पर ही मामला निपट जाता था। लेकिन अब सेमेस्टर प्राणाली लागू होने की वजह से साल में दो बार परीक्षाएं होती हैं। साथ ही, 75 प्रतिशत अनुपस्थिति होना भी अनिवार्य है। ऐसे में छात्रों की रुचि कम होती जा रही है।
विज्ञापन
बीए समेत कई पाठ्यक्रमों में सीटें खाली
बीए में 8, बीकॉम में 5 और बीएससी बॉयोलॉजी में दो सीटें खाली रह गई हैं। जबकि पहले इन पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए एक-एक सीट पर सात से आठ दावेदार रहते थे। अन्य पाठ्यक्रमों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। कॉलेज प्रबंधक का कहना है कि कई छात्रों ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। इस वजह से कुछ सीटें खाली रह गई हैं।
-- -- -- -- -- -- --
अब तक के इतिहास में इस बार सबसे कम दाखिले एमए इकोनॉमिक्स में हुए हैं। 2010 के बाद से एमए इकोनॉमिक्स में लगातार दाखिले कम हो रहे हैं। विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई है।
प्रोफेसर राजीव गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय
विज्ञापन
- 32 साल में 70 प्रतिशत सीटें खाली, 2010 के बाद लगातार गिर रहा ग्राफ, कॉलेज प्रबंधक सेमेस्टर प्रणाली को मान रहा वजह
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जिले के पहले सरकारी कॉलेज में 32 सालों में पहली बार एमए इकोनॉमिक्स में 70 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। यहां पर 60 सीटों पर सिर्फ 18 छात्रों ने ही दाखिला लिया है। यह हाल तब है, जब विश्वविद्यालय की ओर से दाखिले के लिए कई बार तिथि बढ़ाई गई। कॉलेज प्रबंधन का कहना है 2010 से सेमेस्टर प्रणाली लागू होने के बाद से एमए इकोनॉमिक्स में दाखिला लेने वाले छात्रों का ग्राफ कम हो रहा है। लेकिन इस बार जितने कम दाखिले कभी नहीं हुए।
छात्रों की मांग पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संबद्ध सेक्टर- 39 में चल रहे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 1992 में एमए इकोनॉमिक्स की पढ़ाई शुरू की गई थी। शुरुआत में एमए इकोनॉमिक्स में सबसे ज्यादा दाखिले हो रहे थे। सीट की तुलना में कई गुना छात्र आवेदन करते रहते थे। लेकिन 2010 के बाद से सेमेस्टर प्राणाली लागू हो गई। उसके बाद छात्रों के दाखिले कम होने शुरू हो गए।
विज्ञापन
शिक्षकों का कहना है, पहले छात्र दाखिला लेने के बाद सीधे पेपर देने आते थे। सत्र के दौरान बीच बीच में कभी-कभी कक्षाएं लेने आते थे। छात्रों की उपस्थिति कम होने पर भी ज्यादा परेशानी नहीं हाेती थी। कॉलेज स्तर पर ही मामला निपट जाता था। लेकिन अब सेमेस्टर प्राणाली लागू होने की वजह से साल में दो बार परीक्षाएं होती हैं। साथ ही, 75 प्रतिशत अनुपस्थिति होना भी अनिवार्य है। ऐसे में छात्रों की रुचि कम होती जा रही है।
विज्ञापन
बीए समेत कई पाठ्यक्रमों में सीटें खाली
बीए में 8, बीकॉम में 5 और बीएससी बॉयोलॉजी में दो सीटें खाली रह गई हैं। जबकि पहले इन पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए एक-एक सीट पर सात से आठ दावेदार रहते थे। अन्य पाठ्यक्रमों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। कॉलेज प्रबंधक का कहना है कि कई छात्रों ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। इस वजह से कुछ सीटें खाली रह गई हैं।
अब तक के इतिहास में इस बार सबसे कम दाखिले एमए इकोनॉमिक्स में हुए हैं। 2010 के बाद से एमए इकोनॉमिक्स में लगातार दाखिले कम हो रहे हैं। विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी दी गई है।
प्रोफेसर राजीव गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय